कोलकाता सिटी

बेटे को ब्रिटेन ले जाने की अनुमति मिली सुप्रीम कोर्ट से 

बारासात से लेकर दिल्ली तक लड़नी बड़ी मां को जंग 

Jitendra Kumar Singh

पिता की अपील पर हाई कोर्ट का फैसला मेरिट के आधार पर  जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता कोलकाता : बेटे को ब्रिटेन ले जाने की अनुमति मां को सुप्रीम कोर्ट से मिल गई। अब यह बात दीगर है कि मां को इसके लिए 12 साल तक बारासात के लोअर कोर्ट से लेकर लेकर दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट जंग लड़नी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पिता की तरफ से दायर अपील पर हाईकोर्ट मेरिट के आधार पर फैसला लेगा। माता-पिता के बीच इस जंग की कीमत बेटे को चुकानी पड़ी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता के बेंच ने यह आदेश दिया है। पिता के खिलाफ पोक्सो के तहत मामला दायर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है अगर बेटे को पिता के पास रखा जाता है तो गवाह प्रभावित हो सकता है। इस मामले में बेटा ही गवाह है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिता के खिलाफ पोक्सो का मामला चल रहा है। उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ऐसे में अगर बेटे को उसकी हिफाजत में दे दिया जाता है तो वह निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से गवाही नहीं दे पाएगा। यह मामला बारासात कोर्ट में चल रहा है। यह कहानी एक दंपति की है जिनका ब्याह 2011 में हुआ था। इस बेटे का जन्म 2013 में हुआ था। पर सब कुछ सुखद नहीं रहा और पत्नी अपने बेटे और बेटी को लेकर 2018 में ससुराल छोड़कर चली गई। पत्नी को अपनी नौकरी के कारण विभिन्न स्थानों पर  रहना पड़ा था। संतान को लेकर विवाद हुआ तो दिल्ली के एक फैमिली कोर्ट ने दोनों बच्चों को पिता की हिफाजत में दे दिया। पत्नी को 2023 में लगा कि उसके बेटे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है। वह उसे इलाज के लिए बेंगलुरु के निमहांस में ले गई। वहां बेटे ने अपने पिता के खिलाफ डॉक्टर के समक्ष यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद उसने अपने पति के खिलाफ बेटे का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए बरसात कोर्ट में मामला दायर किया। इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। पति ने इस एफआईआर को खारिज करने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की है। यह मामला अभी विचाराधीन है। इस दौरान मां को ब्रिटेन के एक विश्वविद्यालय में नौकरी मिल गई और वह बेटे को अपने साथ ले जाना चाहती है। इसलिए उसने सुप्रीम कोर्ट के मामला दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है। इसके साथ ही कहा है कि हाई कोर्ट में पति की तरफ से दायर मामले में हाई कोर्ट मामले की मेरिट के आधार पर विचार करेगा। वह सुप्रीम कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट की इस मामले में की गई टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगा।

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