जितेंद्र , सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : निर्वाचन आयोग को चुनाव कराए जाने के मामले में असीमित अधिकार है। इस बाबत दायर एक पीआईएल की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिविजन बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने कहा कि शांत एवं निष्पक्ष चुनाव करना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। मतदान केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर यह पीआईएल दायर की गई थी.
एडवोकेट अनामिका पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की तरफ से दायर पीआईएल में मतदान केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही शांत और निष्पक्ष चुनाव कराने का आदेश देने की अपील की गई थी। बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मैकिंटोश बर्न एंड कंपनी को सौंपी गई थी, पर इस कंपनी ने अचानक काम बंद कर दिया था। इसके बाद ही यह पीआईएल दायर की गई थी। निर्वाचन आयोग ने यह जिम्मेदारी अब एनबीसीसी नामक कंपनी को सौंप दी है। राज्य सरकार की मुख्य सचिव ने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भेज कर इस पर एतराज जताया था। उनकी दलील थी कि सारा काम पूरा हो चुका है। दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग के सर्वे के मुताबिक अभी तीस फीसदी काम भी नहीं हो पाया था। इस मामले में बहस करते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा था कि मतदान केंद्र आमतौर पर स्कूलों को बनाया जाता है और शिक्षा विभाग ही यह काम कर सकता है। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया था कि अगर पीडब्ल्यूडी की बात कहते तो समझ में आती पर शिक्षा विभाग कैसे यह काम कर सकता है। डिवीजन बेंच ने आदेश दिया है बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम निर्वाचन आयोग की देखरेख में होगा और इसमें राज्य सरकार दखल नहीं दे सकती है।