जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मतदान के दिन बूथों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के सवाल पर टकराव की स्थिति बन गई है। सामान्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी या अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्या ने हाई कोर्ट में यह पीआईएल दायर की है। चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिवीजन बेंच में बुधवार को सुनवाई अधूरी रह गई। अब अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
केंद्र सरकार की तरफ से पैरवी कर रही एडवोकेट अनामिका पांडे ने बताया की बूथों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मैकिनटोश बर्न एंड कंपनी को दी गई थी। इस कंपनी ने अचानक काम बंद कर दिया। इसके बाद ही शमिक भट्टाचार्या ने पीआईएल दायर की थी। निर्वाचन आयोग ने इस कंपनी के जाने के बाद एनबीसीसी को नियुक्त किया है। यह कंपनी मतदान केंद्रों पर बिजली, पंखा और रैंप आदि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरा करेगी। इसके साथ ही बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही लाइव स्ट्रीमिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराएगी। एडवोकेट अनामिका पांडे ने बताया कि 20 फरवरी को राज्य सरकार की मुख्य सचिव ने एक पत्र जारी करके कहा है कि बूथों पर परंपरागत तरीके से व्यवस्था की जाएगी। बीडीओ यह जिम्मेदारी निभाएंगे। मुख्य सचिव के इस आदेश को भी चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि कंपनी की नियुक्ति करने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। निर्वाचन आयोग के इस फैसले में राज्य सरकार दखल नहीं दे सकती है। एडवोकेट पांडे ने कहा कि हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करने के बाद यह पत्र जारी किया गया है। शमिक भट्टाचार्या की तरफ से दायर पीआईएल शांतिपूर्ण व निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने का सवाल भी उठाया गया है। इसमें 2021 के विधानसभा चुनावों के पहले और बाद में हुई हिंसा का हवाला भी दिया गया है। इसमें डिविजन बेंच से अपील की गई है कि वह बगैर किसी हिंसा के चुनाव कराया जाना सुनिश्चित करे।