जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस अशोक कुमार माथुर और जस्टिस बारिन घोष ने सन 2000 में 25 अगस्त को एक सेक्स वर्कर को मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया था। इसके बाद से मुआवजे की रकम हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास पड़ी है। उसे भुगतान नहीं किया गया है। चीफ जस्टिस सुजय पाल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के डिविजन बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई की जाने का आदेश दिया है।
एडवोकेट तापस कुमार भंज ने यह जानकारी देते हुए बताया कि जस्टिस माथुर के बेंच ने इस सेक्स वर्कर को मुआवजे के मद में बीस हजार रुपए दिए जाने का आदेश दिया था। उसे भुगतान तो हुआ नहीं और इसके बाद मामला दाखिल दफ्तर हो गया। जस्टिस भंज ने इसे चीफ जस्टिस के बेंच में मेंशन करते हुए इसकी सुनवाई करने की अपील की तो उन्होंने सोमवार को सुनवाई किए जाने की बात कही। जस्टिस भंज ने इसे मेंशन करते हुए कहा कि वह सेक्स वर्कर आज भी जिंदा है। उन्होंने बताया कि कालीघाट थाने के एक पुलिस अफसर ने एक सेक्स वर्कर के साथ जबरन शारीरिक संपर्क बनाने का प्रयास किया था। सेक्स वर्कर के बॉडी गार्ड ने इसका विरोध किया तो उसे कालीघाट थाने ले जाया गया था। पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद काफी हंगामा हुआ था और 1996 में इसे लेकर हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की गई थी। जस्टिस माथुर के बेंच ने पीआईएल की सुनवाई के बाद सन दो हजार के अगस्त में आदेश दिया था कि सेक्स वर्कर को बीस हजार रुपए बतौर मुआवजा दिया जाए। बॉडी गार्ड के परिवार को 40 हजार रुपए मुआवजे के मद में दिए जाने का आदेश दिया गया था। बॉडी गार्ड के परिवार को तो मुआवजा दे दिया गया। सेक्स वर्कर के मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दाखिल कर दिया कि उसका पता ठिकाना नहीं मिल रहा है। इसके बाद से वह रकम रजिस्ट्रार जनरल के पास पड़ी है।