जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोललकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस ऋृतब्रत कुमार मित्रा को एक मामले की सुनवायी करते हुए फिल्म मुन्ना भाई एमबीबीएस की याद आ गई। टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तो उसी तरह का मामला है। जस्टिस मित्रा ने शांतिनिकेतन मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में फिलहाल पीजी कोर्स की शुरुआत करने पर रोक लगा दी है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) का एक प्रतिनिधि मंडल शांतिनिकेतन मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल का मुआयना करने गया था। इस कालेज में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स की शुरुआत की जानी है। इस सिलसिले में एनएमसी का प्रतिनिधि मंडल मुआयाना करने गया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि एक फर्जी मरीज को बेड पर लिटा कर रखा गया है। एनएमसी की तरफ से जस्टिस मित्रा को जानकारी दी गई कि शांतिनिकेतन मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल के पास वह बुनियादी ढांचा नहीं है जिसके आधार पर पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स की शुरुआत की जा सके। कहा गया कि सिर्फ पांच विभागों को चलाने के लिए कम से कम 15 प्रोफेसर और डॉक्टरों की आवश्यकता होती है। एनएमसी के प्रतिनिधि मंडल ने जांच के दौरान पाया कि वहां सिर्फ तीन डॉक्टर और प्रोफेसर ही हैं। एनएमसी की तरफ से दाखिल एफिडेविट में कहा गया है कि जांच के दौरान वहां एक फर्जी मरीज पाया गया। इस मरीज का कोई केस हिस्टरी ही नहीं दिखा पाएं। इसके बाद ही जज ने कहा कि यह तो मुन्ना भाई एमबीबीएस का मामला है। इस फिल्म में संजय दत्त ने भूमिका निभायी थी। इसमें भी फर्जी मरीजों को दिखाया गया था, अब यह बात दीगर है कि यहां इंस्पेक्शन करने एनएमसी के अफसर नहीं आए थे। यहां गौरतलब है कि शांतिनिकेतन मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल की स्थापना 2021 में एक निजी मेडिकल कालेज के रूप में की गई थी।