कोलकाता सिटी

बेटे को फर्ज का पाठ पढ़ने को माता-पिता हाई कोर्ट मे

बेटे की भाषा पर जज नाराज

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : एक वृद्ध माता-पिता ने बेटे को फर्ज का पाठ पढ़ने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है। इस बाबत बेटे की तरफ से दाखिल एफिडेविट की भाषा पर जस्टिस कृष्णा राव ने सख्त नाराजगी जताई है। साथ ही बेटे को इंसान बनने की सलाह भी दी है।. दंपत्ति की पीड़ा सिर्फ बेटे को लेकर ही नहीं है, बहू भी उससे एक कदम आगे है।

83 साल के पिता और 79 साल की मां ने कोर्ट में खुद ही सवाल जवाब किया। अदालत इस दौरान स्तब्ध हो गई थी। वहां मौजूद एडवोकेट व अन्य खामोशी के साथ सवाल जवाब सुन रहे थे। बेटे के एडवोकेट तो थे, पर बेटा वर्चुअल मोड में सुनवाई में हिस्सा ले रहा था। बेटे ने मां को मानसिक रूप से बीमार करार दिया है। उसका दावा है कि उसे फर्जी मामले में फंसाया जा रहा है। जस्टिस राव ने स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिया है कि वह 13 मार्च के अंदर एक मनोवैज्ञानिक, एक मानसिक चिकित्सक और एक काउंसिलर का नाम बताए। कोर्ट इन तीनों को शामिल करते हुए एक कमेटी का गठन कर देगा। इसके बाद दंपत्ति और पुत्र को इस कमेटी के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। बेटा आईटी करने के बाद एक कॉरपोरेट कंपनी में बड़ा अफसर बन गया है। पिता कोलकाता विश्वविद्यालय के अध्यापक थे। मां एक महिला कॉलेज में विभागीय प्रधान थी। उसने मां को पागल करार दिया है, शुक्र है कि उसने पिता को यह दर्जा नहीं दिया है। आज वह सफल जीवन में एक बड़े मुकाम पर है, पर वह भूल गया है कि इस मुकाम तक उसे पहुंचाने के लिए उसके माता-पिता को कितना पसीना बहाना पड़ा था। अब वही उनकी आंखों से आंसू बनकर बह रहा है।

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