जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : टीचर के पद पर नियुक्ति के लिए पिछले साल मई में एसएससी की तरफ से एक अधिसूचना जारी की गई थी। पीटिशनर लिखित परीक्षा में सफल रही थी। इसके बाद जब इंटरव्यू का मौका आया तो वैकेंसी ही गायब हो गई। जब एसएससी और बोर्ड ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की तो पीटिशनर ने हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी। जस्टिस अमृता सिन्हा ने एसएससी और बोर्ड को इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
एडवोकेट विक्रम बनर्जी ने बताया कि सायंतिका साहा ने यह पीटिशन दायर किया है। उसने महिला वर्ग में लाइव साइंस के टीचर के पद के लिए आवेदन किया था। उसने माध्यम के रूप में अंग्रेजी को चुना था। लिखित परीक्षा में हिस्सा लेने के बाद वह सफल रही और उसे मेरिट लिस्ट में 51 नंबर मिला था। इसके बाद इंटरव्यू के लिए सूची प्रकाश की गई तो उसका नाम ही उसमें से गायब था। जब उसने पूछताछ की तो उसे पता चला कि अंग्रेजी माध्यम वाली वैकेंसी ही रद्द कर दी गई है। उसने हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी। सुनवायी के दौरान एडवोकेट बनर्जी की दलील थी कि लाइव साइंस के लिए बांग्ला माध्यम में कटऑफ मार्क्स 45 रखा गया है और उसे 51 मिला है तो मीडियम बदल कर उसे भी नियुक्ति दी जाए। उसने मीडियम बदलने के लिए आवेदन किया था। एडवोकेट बनर्जी की दलील थी कि वैकेंसी रद्द करने में जब पीटिशनर की कोई भूमिका नहीं है तो इसका खामियाजा उसे क्यों भुगतना पड़ेगा। जस्टिस सिन्हा ने इस बाबत एसएससी के एडवोकेट से सवाल किया तो उनका जवाब था कि यह फैसला बोर्ड के लेवल पर लिया गया था। वैकेंसियों का फैसला बोर्ड ही लेता है और एसएससी उनके आदेश पर अमल करता है। जस्टिस सिन्हा ने आदेश दिया है कि अगली सुनवायी 25 फरवरी को की जाएगी।