जितेंद्र सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस हिरणमय भट्टाचार्य ने डायमंड हार्बर पुलिस जिला के एसपी को यौनउत्पीड़न के एक मामले की जांच का मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया है। इस बाबत दायर पीटिशन में बजज थाने की भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया है। एक युवती का सड़क पर से अपहरण कर लिया गया था। पुलिस की निष्क्रिय भूमिका और अभियुक्त की तरफ से धमकी मिलने के कारण उसने खुदकुशी का प्रयास भी किया था। लघु धाराओं के कारण अभियुक्त को जमानत मिल गई थी।
पीटिशन के मुताबिक खुदकुशी की कोशिश के बाद उसे पास ही के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आईसीयू में रहने के दौरान पुलिस के अफसर ने उसका बयान भी रिकॉर्ड किया था। इस मामले में पैरवी कर रहे एडवोकेट धीरज त्रिवेदी ने दलील दी कि इसका असर एफआईआर पर नहीं दिखा है। एडवोकेट त्रिवेदी ने बताया कि इस युवती का सड़क पर से अपहरण एक फरवरी को किया गया था। वह दो फरवरी को अपने पिता के साथ बजबज थाने में एफआईआर दर्ज कराने गई थी। इस दौरान अभियुक्त हेम यादव थाने में आया और मामला वापस करने के लिए दबाव बनाया था। उस समय महिला पुलिस अफसर रितिका कुंडू थाने में मौजूद थी और उन्होंने अभियुक्त को गिरफ्तार करने का कोई प्रयास नहीं किया था। इस मामले की जांच के लिए पुरूष पुलिस अफसर को नियुक्त किया गया था। एडवोकेट त्रिवेदी ने कहा कि मामला कोर्ट में आने के बाद महिला अफसर को आईओ बनाया गया है। रितिका कुंडू को आईओ बनाने पर ऐतराज जताया तो राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि बजबज थाने में एक ही महिला पुलिस अफसर है। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि इसीलिए इसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी एसपी को सौंपी जा रही है। फिलहाल पीड़िता लिलुआ में रह रही है। जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश दिया है कि अगर पीड़िता वापस आना चाहती है तो उसे बजबज थाने के ओसी को इसकी सूचना देनी पड़ेगी। पुलिस उसके आने की व्यवस्था करेगी। इसके साथ ही ओसी को आदेश दिया है कि युवती और उसके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे और पुलिस इस क्षेत्र के आसपास की चौकस निगरानी करे।