कोलकाता : पश्चिम बंगाल में इस वर्ष दुर्गापूजा से पहले राज्य सरकार ने सरकारी अनुदान को लेकर नई नीति अपनाई है। इसके तहत 10 लाख रुपये से अधिक बजट वाली दुर्गापूजा समितियों को इस बार सरकारी अनुदान नहीं दिया जाएगा।
अनुमान है कि राज्य की कुल दुर्गापूजा समितियों में से लगभग 25 प्रतिशत समितियां इस निर्णय से प्रभावित होंगी, जबकि शेष लगभग 75 प्रतिशत कम बजट वाली समितियों को पूर्व की तरह आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार का मानना है कि बड़े बजट वाली दुर्गापूजा समितियां प्रायोजकों और अन्य स्रोतों से पर्याप्त धन जुटाने में सक्षम हैं। ऐसे में सरकारी सहायता का लाभ मुख्य रूप से उन छोटे और मध्यम स्तर की समितियों को दिया जाएगा, जिन्हें आयोजन के लिए आर्थिक सहयोग की वास्तविक आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य से अनुदान वितरण के मानकों में बदलाव किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि सीमित सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग जरूरतमंद आयोजकों के हित में किया जाना चाहिए।
इसलिए जिन समितियों का बजट अपेक्षाकृत कम है, उन्हें वित्तीय सहायता देकर पारंपरिक और सामुदायिक दुर्गापूजा आयोजनों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं, बड़े और भव्य आयोजनों को अपने संसाधनों और प्रायोजकों के माध्यम से आयोजन करने की अपेक्षा की गई है।
इस निर्णय के बाद कई बड़ी दुर्गापूजा समितियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ आयोजकों का कहना है कि वे सरकारी अनुदान के बिना भी आयोजन करने में सक्षम हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सभी समितियों के लिए समान नीति होनी चाहिए।
दूसरी ओर, छोटी समितियों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे सीमित संसाधनों वाले आयोजनों को राहत मिलेगी।
दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव माना जाता है। हर वर्ष हजारों पूजा समितियां इसमें भाग लेती हैं और राज्य सरकार उनकी सहायता के लिए अनुदान प्रदान करती रही है।
इस वर्ष नई व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से सक्षम बड़ी समितियों को अनुदान से बाहर रखकर संसाधनों को अधिक जरूरतमंद आयोजनों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है।