कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद के सभागार में देबलोक सोशल-कल्चरल फाउंडेशन के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला ‘हर घर संस्कृत’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमियों और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा, श्रीमद्भगवद्गीता तथा भारतीय संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था।
आचार्य अनुभव हाजरा ने बताए संस्कृत सीखने के सरल तरीके
कार्यक्रम के पहले सत्र का संचालन संस्कृत विद्वान, शोधकर्ता एवं लेखक आचार्य अनुभव हाजरा ने अपने विद्यार्थियों के साथ किया। उन्होंने संस्कृत की उत्पत्ति, भाषाई विशेषताओं और दैनिक जीवन में इसके इस्तेमाल के सरल तरीकों को उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया। भारत सेवाश्रम संघ के पद्मश्री स्वामी प्रदीप्तानंद जी महाराज (कार्तिक महाराज) ने भी संबोधित करते हुए भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।
संस्कृत और संगीत के समन्वय पर हुई चर्चा
दूसरे सत्र में प्रख्यात संगीतज्ञ एवं शोधकर्ता आचार्य संजय चक्रवर्ती ने आचार्य अनुभव हाजरा के साथ संस्कृत और संगीत के संबंधों पर संवाद किया। उन्होंने भारतीय साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के आपसी जुड़ाव को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में भारतीय भाषा परिषद के आशीष झुनझुनवाला, बिमला पोद्दार तथा वेदांत इंस्टीट्यूट के एल. रामास्वामी और डॉ. सुभाषिस चक्रवर्ती सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यशाला के माध्यम से संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया गया।