दुर्गापूजा की विधियों और मंत्रों को जानने की उत्सुकता 
कोलकाता सिटी

पुजारियों से ज्यादा आम लोगों में दुर्गापूजा की विधियों और मंत्रों को जानने की उत्सुकता

7 से 14 सितंबर तक होगी 40वीं कार्यशाला

कोलकाता : दुर्गापूजा की तैयारियों के बीच पूजा की विधि, मंत्रों और धार्मिक परंपराओं को समझने में आम लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। प्रतिष्ठित कोलकाता परिवारों के सदस्य और दुर्गापूजा आयोजक कई बार पुरोहितों से भी अधिक उत्सुकता के साथ पूजा की बारीकियां जानना चाहते हैं।

यह जानकारी सर्व भारतीय प्राच्य विद्या अकादमी के प्राचार्य जयंत कुशारी ने दी। अकादमी हर वर्ष पूजा से पहले अनुष्ठान प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करती है।

7 से 14 सितंबर तक होगी 40वीं कार्यशाला

अकादमी की 40वीं वार्षिक कार्यशाला 7 से 14 सितंबर तक शोभाबाजार राजबाड़ी में आयोजित होगी। इसमें पुरोहितों और श्रद्धालुओं को पूजा की प्रक्रिया, श्लोकों, मंत्रों और विभिन्न परंपराओं की जानकारी दी जाएगी।

कुशारी के अनुसार, प्रशिक्षण में पूजा के दौरान उचित आचरण पर भी जोर रहेगा। उनका कहना है कि पूजा केवल फूल चढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे निर्धारित विधि और धार्मिक अर्थ भी महत्वपूर्ण हैं।

महास्नान से होम तक विधियों की दी जाएगी जानकारी

कार्यशाला में महास्नान, महापूजा, बलिदान और होम जैसी प्रमुख विधियों की प्रक्रिया समझाई जाएगी। साथ ही श्लोकों और मंत्रों के सही उच्चारण का अभ्यास कराया जाएगा। जयंत कुशारी ने बताया कि दुर्गापूजा पौराणिक परंपरा पर आधारित है।

इसमें बृहन्नंदिकेश्वर पुराण और देवी पुराण का संदर्भ मिलता है, जबकि संधि पूजा में चामुंडा आराधना के लिए कालिका पुराण और चंडीपाठ के लिए मार्कंडेय पुराण का आधार लिया जाता है।

उन्होंने बताया कि बंगाल और बांग्लादेश में दुर्गोत्सव तत्त्व, मिथिला क्षेत्र में दुर्गाभक्ति तरंगिणी तथा देश के अन्य हिस्सों में दुर्गोत्सव विवेक परंपरा का पालन होता है। इन परंपराओं में अनुष्ठानों और दक्षिणा देने के समय में भी कुछ अंतर देखने को मिलता है।

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