सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात देते हुए दोपहिया वाहन खरीदने के लिए मिलने वाले एडवांस की सीमा बढ़ा दी है। अब कर्मचारी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने के लिए अधिकतम 1.50 लाख रुपये, जबकि पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाइकिल या स्कूटर खरीदने के लिए 1.20 लाख रुपये तक का एडवांस ले सकेंगे। खास बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने इनके लिए अधिक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। वित्त विभाग की ओर से 3 नवंबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार संशोधित नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत न्यूनतम 25,700 रुपये मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
ई-बाइक पर डेढ़ लाख, पेट्रोल बाइक पर 1.20 लाख
नए नियमों के मुताबिक, पहली बार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर अधिकतम 1.50 लाख रुपये का एडवांस मिलेगा। हालांकि, वास्तविक राशि छह महीने के मूल वेतन, वाहन की अनुमानित कीमत और निर्धारित अधिकतम सीमा में से जो सबसे कम होगी, उसके आधार पर तय होगी। वहीं, पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये का एडवांस मिलेगा। इसमें पांच महीने का मूल वेतन और वाहन की अनुमानित कीमत की शर्त लागू होगी।
दूसरी बार मिलेगा 90 हजार रुपये तक
पहले एडवांस का मूलधन और ब्याज पूरी तरह चुकाने के बाद कर्मचारी दोबारा भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, दूसरी बार एडवांस की अधिकतम सीमा 90 हजार रुपये होगी। इसके लिए पहले ऋण की पूरी अदायगी के बाद कम से कम तीन साल का अंतराल अनिवार्य होगा।
पांच साल में चुकाना होगा मूलधन
सरकार ने कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भुगतान की अवधि भी निर्धारित की है। एडवांस के मूलधन की वसूली अधिकतम 60 मासिक किस्तों में होगी। मूलधन चुकाने के बाद अगले महीने से ब्याज की वसूली शुरू होगी, जिसे अधिकतम 20 किस्तों में जमा करना होगा। ब्याज साधारण ब्याज की दर से लिया जाएगा।
अब वित्त विभाग के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं
आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने मंजूरी देने का अधिकार संबंधित प्रशासनिक विभागों को सौंप दिया है। इससे कर्मचारियों के आवेदन का निपटारा तेजी से होने की उम्मीद है। हालांकि, किस्तों के भुगतान में देरी करने वाले कर्मचारियों को राहत नहीं मिलेगी। निर्धारित समय पर किस्त नहीं चुकाने की स्थिति में 8 प्रतिशत सालाना की दर से दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है।