उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर के तर्ज पर होगा विकास
आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन की योजना
दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने गंगासागर को देश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल तेज कर दी है। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की 'प्रसाद' (PRASHAD–Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive) योजना के तहत गंगासागर के समग्र और एकीकृत विकास के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों के अनुसार राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग के सचिव सौमित्र मोहन ने केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
महाकाल कॉरिडोर के तर्ज पर बदलेगी गंगासागर की तस्वीर
राज्य सरकार के प्रस्ताव में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर के PRASHAD योजना के तहत किए गए व्यापक विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गंगासागर के विकास के लिए भी इसी तरह का समग्र मॉडल अपनाया जा सकता है। उद्देश्य गंगासागर को ऐसा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाना है, जहां श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिलें और क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखा जा सके।
विकसित होंगी आधुनिक तीर्थ और पर्यटन सुविधाएं
प्रस्ताव के तहत गंगासागर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाओं के विकास की योजना बनाई गई है। इसमें श्रद्धालुओं के ठहरने, विश्राम, सार्वजनिक सुविधाओं और आगंतुकों की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी व्यवस्थाओं का विस्तार शामिल है। इसके अलावा, मकर संक्रांति के दौरान आने वाली लाखों की भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए स्मार्ट मोबिलिटी और आधुनिक भीड़ प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। तकनीक आधारित इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने पर जोर रहेगा। गंगासागर के धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने लाने के लिए हेरिटेज इंटरप्रिटेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से आगंतुकों को क्षेत्र की समृद्ध विरासत और परंपराओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रस्ताव में रिवरफ्रंट और पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के पवित्र संगम क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए हरित विकास और बेहतर सुविधाओं की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास का भी प्रस्ताव रखा गया है।
डीपीआर तैयार करने में पर्यटन मंत्रालय से मांगा सहयोग
राज्य सरकार ने प्रस्ताव में कहा है कि परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग संबंधित विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर PRASHAD योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगा। इसके साथ ही केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से डीपीआर तैयार करने, उसके मूल्यांकन और आगे की प्रक्रिया में तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग देने का आग्रह किया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि गंगासागर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इसकी राष्ट्रीय और आध्यात्मिक महत्ता को देखते हुए इसे विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।