रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : विश्व प्रसिद्ध गंगासागर मेला में इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण और तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहली बार एंटी स्मॉग गन का प्रयोग किया जाएगा। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वित्तपोषित तथा सुंदरवन मामलों के विभाग की इस पहल के तहत मेले में दो एंटी स्मॉग गन तैनात की जाएंगी। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य मेले के दौरान बढ़ने वाले धूल-प्रदूषण को नियंत्रित कर वायु गुणवत्ता में सुधार करना है।
एंटी स्मॉग गन एक आधुनिक उपकरण है, जिसका उपयोग वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है। यह पानी की अत्यंत सूक्ष्म फुहार का छिड़काव करती है, जिससे हवा में मौजूद धूल कण और प्रदूषक नीचे बैठ जाते हैं और वातावरण स्वच्छ होता है। विशेष रूप से भीड़-भाड़ वाले खुले क्षेत्रों और त्योहारों के दौरान, जब लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं, यह तकनीक अत्यंत प्रभावी साबित होती है। यह मशीन एक बार में 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकती है। इसकी पानी की टंकी की क्षमता 1000 लीटर है और इसकी छिड़काव सीमा 10 से 15 मीटर तक है। अधिकारियों के अनुसार, इसके उपयोग से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में लगभग 50 प्रतिशत तक सुधार संभव है। इसे 1–5 नंबर रोड, कपिल मुनि मंदिर एवं उसके आसपास, K1 बस टर्मिनस, यात्रियों के चढ़ने-उतरने के क्षेत्रों और हेलीपैड पर उपयोग में लाया जाएगा।
इसके साथ ही मेले में ईवी बायो टॉयलेट और इलेक्ट्रिक पोर्टेबल सैंड क्लीनिंग मशीन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। ईवी बायो टॉयलेट एक इलेक्ट्रिक पोर्टेबल शौचालय है, जिसमें पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग कक्ष हैं। यह संकरी सड़कों पर भी आसानी से चल सकता है और बैक्टीरिया की सहायता से अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल निपटान करता है। वहीं, इलेक्ट्रिक सैंड क्लीनिंग मशीन समुद्र तट की रेत से कचरा और प्लास्टिक हटाकर तट को स्वच्छ एवं आकर्षक बनाए रखने में मदद करेगी। इन पहलों से गंगासागर मेला न केवल श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।