रामबालक दास, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हैम रेडियो के माध्यम से समुद्र क्षेत्र में एक नई तकनीक की शुरुआत की गई है। अब हैम रेडियो के ज़रिए ही पूरी दुनिया से संपर्क संभव होगा। संदेशों के सुरक्षित आदान-प्रदान और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके माध्यम से देश के किसी भी कोने में पलों में सुरक्षित संदेश भेजा जा सकेगा। अब तक वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब के हैम रेडियो सदस्य जिला प्रशासन के आमंत्रण पर गंगासागर मेले में एनालॉग रेडियो के माध्यम से सेवाएं देते आ रहे हैं। मेले के दौरान खोए हुए लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के साथ-साथ, गंभीर रूप से बीमार तीर्थयात्रियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एयर एंबुलेंस द्वारा कोलकाता के विभिन्न सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में स्थानांतरित किया जाता रहा है। ऐसे अज्ञात या अपरिचित रोगियों, जिनके पता या परिवार की जानकारी उपलब्ध नहीं होती, उनके परिजनों तक संदेश पहुंचाने में यह नई तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब व हैम रेडियो के सचिव अंबरीष नाग विश्वास ने जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद हैम रेडियो ऑपरेटरों तक तुरंत संदेश पहुंचाया जा सकेगा, जिससे तेजी से परिणाम मिलने की उम्मीद है। अब तक हैम रेडियो ऑपरेटर अस्थायी कंट्रोल रूम से पूरे देश में संदेश प्रसारित करते रहे हैं। पिछले 36 वर्षों से हैम रेडियो ऑपरेटर इसी तरह सेवा प्रदान करते आ रहे हैं। इस वर्ष मेले के कुछ भौगोलिक परिवर्तनों के कारण हैम रेडियो कंट्रोल रूम पर अधिक दबाव पड़ने की संभावना है। साथ ही, कुंभ मेला न होने के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के सागर आने की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, सागर मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में भी हैम रेडियो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘डीएमआर’ (DMR) रेडियो आधुनिक दुनिया में रेडियो तरंगों की एक नई तकनीक है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संदेशों को गोपनीय रखा जा सकता है। केवल अधिकृत व्यक्ति ही आवश्यक और महत्वपूर्ण संदेश सुन पाएंगे, अन्य कोई उस तरंग को सुन नहीं सकेगा। मेले की भीड़ या माइक के शोर के बीच यदि वाहन नंबर जैसी संवेदनशील जानकारी सुनाई न दे, तो चिंता की कोई बात नहीं—रेडियो के माध्यम से एसएमएस भी भेजा जा सकता है। इसीलिए कहा जा सकता है कि इस बार सागर पूरी तरह डिजिटल हो गया है।