फाइल फोटो 
कोलकाता सिटी

ममता बनर्जी के खिलाफ हेस्टिंग्स थाने में FIR

TMCP के स्थापना दिवस पर कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन और पुलिस से धक्का-मुक्की का आरोप

Deepak Mishra

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : तृणमूल छात्र परिषद के स्थापना दिवस समारोह के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने, पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और यातायात बाधित करने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ हेस्टिंग्स थाने में FIR दर्ज की गई है। कोलकाता पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की है।

हाईकोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप

उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद शुक्रवार को कैथेड्रल रोड पर टीएमसीपी की जनसभा आयोजित की गई थी। अदालत ने कार्यक्रम के लिए कुछ सख्त शर्तें तय की थीं। निर्देशानुसार, सड़क के उत्तरमुखी लेन को वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखकर केवल एक हिस्से में सभा करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक का समय निर्धारित किया था। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान दोनों लेन बंद हो गए और निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी सभा जारी रही।

भीड़ को उकसाने और पुलिस से धक्का-मुक्की का आरोप

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, सभा के दौरान ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए उकसाया। इसके बाद उत्तेजित भीड़ ने बैरिकेड्स हटा दिए और वहां तैनात पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस अराजक स्थिति के कारण कैथेड्रल रोड पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की चेतावनी के बाद एक्शन

कैथेड्रल रोड की घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री पर उच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उन्होंने पुलिस प्रशासन को इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज

कोलकाता पुलिस ने ममता बनर्जी और टीएमसीपी के आयोजकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गौरतलब है कि एक महीने पहले 21 जुलाई को आयोजित तृणमूल के कार्यक्रम को लेकर भी इसी तरह का विवाद खड़ा हुआ था। उस समय भी अदालत के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगा था, जिस पर उच्च न्यायालय ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि भविष्य में अदालत के आदेशों की अवहेलना करने पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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