कोलकाता : पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और हिंसा पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मंगलवार को राज्य सचिवालय नवान्न में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने घोषणा की कि ग्राम पंचायत प्रधानों के वित्तीय अधिकार समाप्त करने के लिए विधानसभा में नया विधेयक लाया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत वित्तीय स्वीकृति का अधिकार प्रधानों के बजाय सरकारी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा, जैसा कि देश के कई अन्य राज्यों में पहले से लागू है।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि पंचायतों में वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और कटमनी की लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए सरकार यह सख्त कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। कृषि, वानिकी, ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर हुई बैठक को मंत्री ने राज्य के विकास के लिए "मील का पत्थर" बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है।
बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि ग्रामीण आवास योजना के तहत राज्य को एक लाख नए आवासों की मंजूरी रही। मंत्री के अनुसार, लाभार्थियों के चयन के लिए सर्वेक्षण का कार्य शुरू हो चुका है और प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया जाएगा। राज्य की पंचायत व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए दिलीप घोष ने स्वीकार किया कि कई स्थानों पर कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक चुनौतियां हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी।