फलता में जीत के बाद जश्न मनाते भाजपा समर्थक 
कोलकाता सिटी

फलता में भाजपा की सुनामी, 'पुष्पा' चौथे स्थान पर

भाजपा की रिकॉर्ड जीत, तृणमूल चौथे नंबर पर खिसकी महिलाओं ने मंदिर में की पूजा-अर्चना

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : सत्ता में रहते जिस इलाके को तृणमूल ने किला बना दिया गया था, सत्ता गंवाने के महज 20 दिनों के भीतर वही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। मतदान से पहले ही किले के पहरेदार 'पुष्पा' के झुक जाने से भाजपा ने लगभग खाली मैदान में गोल कर दिया। फलता के लोगों ने भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बात रख ली। उसी के मुताबिक उनकी पार्टी के उम्मीदवार को करीब 1,49,666 वोट मिले हैं। जीत का अंतर करीब 1,09,021 वोट रहा। वहीं, माकपा उम्मीदवार शंभूनाथ कुड़मी को 40,645 वोट मिले, जिससे वह दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले, जबकि फलता में जीत के बाद जश्न मनाते भाजपा समर्थक तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ पुष्पा को मात्र 7,783 वोट प्राप्त हुए। इसके साथ ही तृणमूल चौथे स्थान पर पहुंच गई। इसे डायमंड हार्बर मॉडल के चकनाचूर होने के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि फलता में तृणमूल का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। पिछले गुरुवार को फलता में हुए पुनर्मतदान के दिन तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान मैदान में नजर नहीं आए थे। रविवार को मतगणना के दिन भी वही तस्वीर दिखी। पूरे दिन 'पुष्पा' पर्दे के पीछे ही रहे। मतदान के दिन जैसे किसी बूथ पर तृणमूल का एजेंट नहीं था, वैसे ही मतगणना केंद्र में भी पार्टी का कोई एजेंट दिखाई नहीं दिया। पुनर्मतदान से दो दिन पहले जहांगीर के चुनाव मैदान छोड़ने की घोषणा के बाद से ही फलता में भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। आखिरी दिन के प्रचार में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक लाख वोटों से जीत का लक्ष्य भी तय कर दिया था। नजर सिर्फ जीत के अंतर पर थी। जिस फलता में पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने करीब 1.5 लाख से अधिक वोटों की बढ़त ली थी, वहीं इस बार जहांगीर को महज 7,783 वोट मिले। पिछले महीने विधानसभा चुनाव के दौरान ही कई कारणों से जहांगीर चर्चा में आ गए थे। उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पर्यवेक्षक बनकर आने के बाद जहांगीर के साथ उनकी ठंडी लड़ाई ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया था। लेकिन मतदान के दिन कई बूथों के ईवीएम में स्याही और टेप लगाने जैसी अनियमितताओं के आरोपों के बाद फलता का मतदान रद्द कर दिया गया। आयोग ने पुनर्मतदान की घोषणा की। मगर राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फलता के पुनर्मतदान को लेकर पूर्व सत्ताधारी दल तृणमूल के भीतर कोई उत्साह नजर नहीं आया। 4 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद जहांगीर कुछ दिनों के लिए लगभग गायब हो गए थे। बाद में पुलिस उन्हें इलाके में वापस लाई। लौटने के बाद उन्होंने "पुष्पा झुकेगा नहीं" कहकर चेतावनी भी दी थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने घोषणा कर दी कि वह पुनर्मतदान में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला फलता के विकास के लिए मुख्यमंत्री शुभेदु की योजनाओं के हित में लिया गया है। हालांकि तृणमूल ने साफ कर दिया था कि यह फैसला सिर्फ जहांगीर का है, पार्टी का नहीं।

भाजपा की जीत के बाद महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

भाजपा उम्मीदवार की जीत दर्ज करने के बाद फलता विधानसभा के दीघिर पाड़ा स्थित मनसा मंदिर में स्थानीय महिलाओं ने पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे को बधाई दी। महिलाओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले 15 वर्षों से फलता में आतंक का माहौल था। अब इलाके में "राम राज्य" कायम होगा।

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