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कोलकाता सिटी

महंगी जीवनरक्षक दवाएं लापरवाही से हो रहीं बर्बाद!

अस्पताल के औचक निरीक्षण में खुली अव्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री ने जताई नाराजगी

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : गरीब और जरूरतमंद मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई महंगी जीवनरक्षक दवाओं के रखरखाव में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। जादवपुर टीबी अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय ने दवा भंडार में अव्यवस्था देख नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान हजारों रुपये कीमत वाली कई दवाएं लंबे समय से इस्तेमाल के बिना पड़ी मिलीं। इनमें से कुछ दवाओं की एक्सपायरी करीब एक वर्ष पहले ही समाप्त हो चुकी थी। दवा के डिब्बों पर धूल जमी होने पर स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के कर्मचारियों से जवाब भी तलब किया।

रजिस्टर में भी नहीं मिला नियमित हिसाब

स्वास्थ्य मंत्री ने दवा भंडार के साथ अस्पताल में रखे टीबी मरीजों के दवा वितरण संबंधी रजिस्टर की भी जांच की। नियम के मुताबिक, टीबी मरीजों को रोजाना दी जाने वाली दवाओं की मात्रा और प्रकार का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए। साथ ही मरीज के उपचार की प्रगति और इलाज के परिणाम का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है। हालांकि, निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने पाया कि कुछ रजिस्टर में 28 जुलाई के बाद, जबकि कुछ में 19 अगस्त के बाद कोई जानकारी दर्ज नहीं की गई थी। इस पर उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के बाद भी अस्पताल की ओर से इस लापरवाही का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका।

13 से 16 हजार रुपये तक की एक दवा की कीमत

केंद्र सरकार राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी और ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी जैसे गंभीर रोगों के इलाज के लिए मरीजों को दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराती है। इनमें बेडाक्विलिन जैसी महंगी दवाएं भी शामिल हैं। बाजार में इसके एक बॉक्स की कीमत करीब 13 से 16 हजार रुपये तक बताई जाती है। ऐसे में इन दवाओं का इस्तेमाल न होना और एक्सपायर हो जाना सरकारी संसाधनों के नुकसान के साथ-साथ मरीजों के इलाज पर भी असर डाल सकता है।

लापरवाही पर स्वास्थ्य मंत्री ने जताई नाराजगी

दवा के डिब्बों पर धूल और एक्सपायर हो चुकी दवाएं देखकर स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल कर्मचारियों से सवाल किया कि दवाओं के रखरखाव और सफाई की नियमित व्यवस्था क्यों नहीं की गई। निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति पर मंत्री ने स्पष्ट नाराजगी जताई और अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज के लिए सरकार महंगी दवाएं उपलब्ध करा रही है। ऐसे में उनका लापरवाही से पड़े-पड़े खराब होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

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