कोलकाता : पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) के आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) से मांग की है कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सूची से बाहर हुए पात्र मतदाताओं के दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाय चुनाव कराए जाएं।
विपक्ष का कहना है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने के कारण चुनाव से पहले उन्हें मतदान का अवसर सुनिश्चित करना जरूरी है। इस संबंध में राज्य चुनाव आयुक्त को सौंपे गए पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय और माकपा के पूर्व सांसद समिक लाहिड़ी सहित नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने अपनी मांग रखी है।
उनका तर्क है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले चुनाव कराने पर कई पात्र मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
मतदाता सूची में संशोधन पूरा होने तक चुनाव टालने की मांग
विपक्षी नेताओं ने अपने पत्र में कहा है कि कोलकाता नगर निगम, हावड़ा नगर निगम और राज्य की अन्य नगरपालिकाओं में चुनाव तभी कराए जाने चाहिए, जब मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाए।
उनका जोर इस बात पर है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम SIR के दौरान हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल होने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
पत्र पर पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय, माकपा के पूर्व सांसद समिक लाहिड़ी और पूर्व राज्यसभा सांसद व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
विपक्ष ने राज्य चुनाव आयोग से अपील की है कि चुनाव की तारीख तय करते समय मतदाता सूची संशोधन की निर्धारित समय-सीमा को ध्यान में रखा जाए।
1.6 लाख से अधिक अपीलों का हवाला, पात्र मतदाताओं को लेकर चिंता
विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ करीब 1.2 लाख अपीलें लंबित हैं, जबकि हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में लगभग 39 हजार अपीलों पर फैसला होना बाकी है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में कुल मिलाकर करीब 1.6 लाख अपीलें लंबित बताई गई हैं।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि जब तक इन मामलों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक संबंधित पात्र मतदाताओं को निकाय चुनाव में मतदान से वंचित होने का खतरा बना रहेगा। इसलिए राज्य चुनाव आयोग को लंबित अपीलों पर विचार करते हुए चुनावी प्रक्रिया निर्धारित करनी चाहिए।
विपक्ष ने यह भी मांग की है कि SIR से जुड़े अपीलीय न्यायाधिकरणों में जिन लोगों के मामले लंबित हैं, उनके नामों को निकाय चुनाव की मतदाता सूची में शामिल करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
12 नवंबर को मसौदा सूची, 4 जनवरी को अंतिम सूची जारी होने की संभावना
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तहत मसौदा मतदाता सूची 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को जारी होने का कार्यक्रम है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और आगामी निर्धारित तिथियों के अनुसार नए पंजीकरण के आवेदनों को स्वीकार करना है। विपक्ष का कहना है कि निकाय चुनाव की तारीख तय करने से पहले इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने देना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटने की वजह से उसे मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
वहीं, भाजपा विधायक रितेश तिवारी ने कहा कि चुनाव कब कराए जाएंगे, इसका फैसला राज्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उन्होंने दावा किया कि चुनाव नवंबर में हों या 4 जनवरी के बाद, भाजपा दोनों ही परिस्थितियों में चुनाव लड़ने के लिए तैयार है और जीत हासिल करेगी। फिलहाल चुनाव स्थगित करने की विपक्ष की मांग पर राज्य चुनाव आयोग का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।