कोलकाता सिटी

रमक झमक में गणगौर पर बुजुर्ग महिलाओं ने सुनाए संस्मरण

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : रमक झमक में चल रहे म्हारी गणगौर उत्सव के दूसरे दिनआधुनिक युग में गणगौर की महत्ता पर परिचर्चा रखी गई जिसमें युवतियों ने विचार रखे तथा बुजुर्ग महिलाओं ने संस्मरण साझा किए। कई महिलाओं ने गणगौर पर केंद्रित रचनाएं सुनाई। परिचर्चा का विषय प्रवर्तन रमक झमक अध्यक्ष प्रहलाद ओझा भैरूं ने किया।ओझा ने कहा कि गणगौर महिलाओ का मुख्य उत्सव है जिसमें गीत नृत्य की प्रधानता है।

वर्तमान में गणगौर के पारम्परिक गीत एवं उनकी रग भूलती जा रही है जबकि बीकानेर और कोलकाता में पुरुष गीत मंडलियां आगे आकर गीत गाकर इन गीतों को बचाए हुए है लेकिन इसका दूसरा पहलू ये है कि अब पुरुषों द्वारा गीत गाने से महिलाओं ने अब रात को समूह में और बड़ी गवर गाना लगभग छोड़ दिया है। महिलाओं को स्वय मंडलिया बनाकर गीत गाना चाहिए।उसमें बड़ी उम्र के साथ नवयुवतियां भी शामिल हो ताकि उनके निर्देशन में महिलाओं की नई पीढ़ी तैयार हो सकें।

वरिष्ठ उम्र की महिला किरण सोनी एवं राजकुमारी व्यास का कहना था कि हमें अपनी परम्परा एवं संस्कृति से जुड़े आयोजन अपनी बहु बेटियों का साथ मिलकर करना चाहिए । डा सुरेखा व्यास,चंद्र कला सोनी,बबिता शर्मा का कहना था कि आधुनिक युग के साथ चले लेकिन हम अपने मूल परम्परा संस्कृति से दूर न हो।विनीता शर्मा, गायत्री देरासरी और प्रीति ओझा का कहना था कि गणगौर उत्सव में मुख्य है परम्परागत गीत। इसलिए गीतों को संरक्षण हो।

इसके लिए रमक झमक द्वारा तैयार म्हारी गणगौर पुस्तक में छपे गीत और उसमें क्यू आर कोड स्कैन के जरिए गीत की राग को बालिकाओं और नवयुवतियों के उपयोगी बताया।प्रियंका सोनी,आस्था छंगाणी,दीपिका सोनी एव प्रीति कुलरिया का कहना था कि आधुनिक समय के साथ चलते हुए हमें अपने मूल संस्कृति से भी जुडा रहना है और गणगौर महिलाओ की मूल संस्कृति हैं। अरुणा सोनी,खुशी सोनी एव ज्योति स्वामी ने गणगौर और मां पर केंद्रित रचनाएं प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि योग फिटनेस प्रशिक्षक पिंकी जैन,विशिष्ट अतिथि गणगौर स्वरूप स्वांग बनाने में स्पेशलिस्ट आरती आचार्य थी।अध्यक्षता राम कंवरी ओझा ने की। दो दिवसीय आयोजन की संयोजक ज्योति स्वामी ने आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व गवरजा का पूजन आरती और खोल भराई की गई तथा ' सुनो ए मा टाबरियों री आशा मनसा पुरो हो ' गीत गा कर जयकारा लगाया गया।

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