सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता में अवैध रेत खनन और तस्करी के मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए व्यापारी अरुण सराफ को गिरफ्तार किया है। गुरुवार रात उन्हें हिरासत में लिया गया और शुक्रवार को उन्हें बिचार भवन (कोलकाता कोर्ट) में पेश किया गया। आरोप है कि अरुण सराफ ने एक विशेष कंपनी के माध्यम से अवैध रूप से रेत की तस्करी की, लेकिन अपने नाम पर कोई औपचारिक हिसाब नहीं रखा। बताया गया कि उन्होंने 103 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई, जबकि उनके खाते में 130 करोड़ रुपये जमा हुए।
अरुण सराफ कोलकाता की एक नामी माइनिंग कंपनी से जुड़े हुए हैं। ईडी का आरोप है कि उन्होंने सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से रेत की खुदाई और बिक्री की। इसके लिए उन्होंने फर्जी ई-चालान का इस्तेमाल किया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया। ईडी अधिकारियों ने अदालत से अरुण को 13 दिनों की हिरासत में देने की मांग की। वहीं, अरुण के वकील ने ईडी के आरोपों का विरोध तो किया, लेकिन जमानत की अर्जी नहीं दी।
ईडी ने अदालत को बताया कि 2020 तक अरुण सराफ और उनकी मां उस माइनिंग कंपनी के निदेशक (डायरेक्टर) पद पर थे। उनके बाद जो निदेशक बने, वे भी अरुण के निर्देश पर काम करते थे। कंपनी के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ में यह जानकारी सामने आई है। राज्य पुलिस ने अवैध रेत तस्करी से संबंधित चार मामले दर्ज किए थे, जिनके आधार पर ईडी ने ईसीआईआर (Enforcement Case Information Report) दायर कर जांच शुरू की।
ईडी के मुताबिक, अरुण सराफ की कंपनी के नाम पर ई-चालान बनाकर रेत की खुदाई और बिक्री की जाती थी। प्रत्येक चालान में क्यूआर कोड होता था, लेकिन जांच में पता चला कि वे सभी चालान फर्जी थे। आरोप है कि 2024 से 2025 के बीच करीब 60 करोड़ रुपये का कोई हिसाब कंपनी नहीं दिखा सकी।
ईडी ने अरुण को तीन बार समन भेजा था। पहली बार वह पेश हुए, लेकिन दूसरी बार अनुपस्थित रहे। तीसरी बार जब वह पूछताछ के लिए पहुंचे, तब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
अरुण के वकील का कहना है कि राज्य पुलिस की चार्जशीट में उनके मुवक्किल का नाम नहीं था और जिन आरोपियों पर मामला चला था, वे बरी हो चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने सवाल उठाया कि ई-चालान जालसाजी की जांच करने का अधिकार ईडी के पास है भी या नहीं।