सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (कोलकाता) पर पिछले एक महीने से ड्यूटी-फ्री दुकानें बंद हैं, जबकि विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) काउंटर लगभग एक साल से बंद पड़ा है। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है मामला ?
1 जुलाई 2026 से एयरपोर्ट पर कोई भी ड्यूटी-फ्री स्टोर संचालित नहीं हो रहा है।
पहले फ्लेमिंगो ड्यूटीफ्री शॉप प्राइवेट लिमिटेड यह सेवा चला रही थी। उसका अनुबंध 21 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया।
नई कंपनी न्यूअंस ग्रुप (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को ठेका मिला है, लेकिन आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां अभी पूरी नहीं हुई हैं।
एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार नई कंपनी 15 अगस्त से संचालन शुरू करने की योजना बना रही है, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें और देरी हो सकती है।
ऐसे में दुर्गा पूजा, जो यात्रा का सबसे व्यस्त समय होता है, उससे पहले पूरी तरह ड्यूटी-फ्री स्टोर शुरू होना मुश्किल माना जा रहा है।
फ्लेमिंगो की मांग ठुकराई गई
फ्लेमिंगो ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 38 वर्गमीटर के छोटे ड्यूटी-फ्री काउंटर से सेवा जारी रखने का प्रस्ताव दिया था।
कंपनी ने कहा था कि नई कंपनी को सुरक्षा मंजूरी और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने में 3–4 महीने लग सकते हैं।
लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
दिल्ली और चेन्नई में ऐसा नहीं हुआ
दिल्ली एयरपोर्ट पर ड्यूटी-फ्री संचालन का हस्तांतरण बिना किसी दुकान को बंद किए रातोंरात कर दिया गया।
चेन्नई एयरपोर्ट पर भी पुरानी कंपनी को नई कंपनी के तैयार होने तक समय बढ़ाया गया था।
लेकिन कोलकाता में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई।
यात्रियों की परेशानी
यात्री अब ड्यूटी-फ्री से मिलने वाले सामान जैसे : शराब, चॉकलेट, परफ्यूम, स्मृति-चिह्न (सुवेनियर) नहीं खरीद पा रहे हैं। कई यात्रियों ने एयरपोर्ट प्रशासन से शिकायत की है कि इससे उनकी यात्रा का अनुभव प्रभावित हो रहा है।
फॉरेक्स काउंटर भी बंद
एयरपोर्ट का विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) काउंटर भी लगभग एक वर्ष से बंद है।
सूत्रों के अनुसार, कोविड के बाद कम यात्रियों और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के कारण ढाका-कोलकाता उड़ानों में कमी आई, जिससे फॉरेक्स संचालक को नुकसान हुआ।
संचालक ने AAI से किराए में 50% की छूट मांगी थी, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई।
असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोलकाता एयरपोर्ट ब्रिटेन और यूरोप के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, तब ड्यूटी-फ्री और फॉरेक्स जैसी बुनियादी सुविधाओं का बंद होना यात्रियों के अनुभव और एयरपोर्ट की छवि दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।