कोलकाता : ब्रेन स्ट्रोक के हल्के लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। लक्षण कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाएं, तब भी मरीज को चिकित्सकीय जांच की जरूरत होती है।
कोलकाता के न्यूरोलॉजिस्टों ने विश्व स्ट्रोक दिवस से पहले लोगों को आगाह करते हुए कहा कि पहले स्ट्रोक के संकेतों को अनदेखा करने से दोबारा गंभीर स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, शहर में स्ट्रोक के लगभग 25 प्रतिशत मरीजों की मौत दोबारा स्ट्रोक होने के बाद हो जाती है, जबकि शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानकर उपचार शुरू किया जा सकता था।
डॉक्टरों ने बताया कि अब कम उम्र के लोगों में भी ब्रेन स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं। स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में चेहरे का एक तरफ झुक जाना, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी और बोलने में परेशानी शामिल हैं। इन संकेतों को उम्र से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जानकारों के अनुसार युवाओं में होने वाले स्ट्रोक के 40 से 55 प्रतिशत मामलों में मस्तिष्क में रक्तस्राव की भूमिका होती है, जबकि सभी स्ट्रोक मामलों में इसका अनुपात लगभग 15 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक के तुरंत बाद लगभग 8 से 10 प्रतिशत मरीजों की मौत होती है। हालांकि, कई मरीजों की बाद में गंभीर संक्रमण, निमोनिया और अन्य बीमारियों के कारण जान चली जाती है। स्ट्रोक के बाद शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता प्रभावित होने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। लगभग आधे स्ट्रोक मरीज देर से अस्पताल पहुंचते हैं। इससे स्थायी दिव्यांगता और मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें, भले ही लक्षण कुछ देर में समाप्त हो जाएं। रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, धूम्रपान छोड़ना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना और हृदय संबंधी बीमारियों का उपचार कराना भी जरूरी है।
उपलब्ध महामारी-विज्ञान संबंधी अध्ययनों के अनुसार, कोलकाता में हर साल प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 105 स्ट्रोक के मामले सामने आते हैं। विशेषज्ञों ने समय पर पहचान और उपचार को गंभीर परिणामों से बचने का अहम उपाय बताया है।