कोलकाता : सदियों पुरानी विरासत को अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा मिलेगा। ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को नई दिशा देने के लिए भारतीय संग्रहालय, कोलकाता ने आईआईटी खड़गपुर के साथ हाथ मिलाया है। दोनों संस्थान मिलकर एआई तकनीक के जरिए पुरावशेषों की बहाली और संग्रहों के डिजिटल संरक्षण पर काम करेंगे।
भारतीय संग्रहालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय संग्रहालय ने गूगल आर्ट एंड कल्चर के सहयोग से विरासत को डिजिटल मंच पर पहुंचाने के लिए एक वर्चुअल प्रदर्शनी भी तैयार की है।
अधिकारी ने बताया कि आईआईटी खड़गपुर के सहयोग से एआई आधारित तकनीक के जरिए क्षतिग्रस्त पुरावशेषों की बहाली की दिशा में काम किया जा रहा है। साथ ही, संग्रहालय के संग्रहों को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की पहल भी की बढ़ाई जा रही है। संग्रहालय में दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित इंटरैक्टिव और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीक भी शुरू की गई है।
वहीं, संस्कृति मंत्रालय देशभर के संग्रहालयों के डिजिटलीकरण के लिए जतन (JATAN) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहा है। सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से संग्रहों का डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार आठ राष्ट्रीय संग्रहालयों में मौजूद 4,78,971 पुरावशेषों में से 3,36,359 यानी 70.23 प्रतिशत को संबंधित वेबसाइटों पर डिजिटल रूप से देखा जा सकता है।