कोलकाता : पश्चिम बंगाल के निजी बस ऑपरेटरों ने सोमवार को राज्य सरकार और न्यायपालिका से 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों को स्क्रैप करने की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
बस ऑपरेटरों के शीर्ष संगठन ज्वाइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट ने सरकार को दिए अपने प्रतिनिधित्व में कहा कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर उसे सड़क से हटाना उचित नहीं है, खासकर तब जब वह निर्धारित प्रदूषण और फिटनेस मानकों को पूरा करता हो।
बस सिंडिकेट ने 2009 के कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि 1 अगस्त 2009 से कोलकाता मेट्रोपॉलिटन एरिया (KMA) में 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई थी।
ऑपरेटरों का कहना है कि इस नीति के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि हजारों बस मालिकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र पर निर्भर है।
प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले पुराने वाहनों को मिले छूट
बस सिंडिकेट के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि उनकी मांग है कि ऐसे पुराने वाहनों को स्क्रैप न किया जाए, जिनके टेलपाइप उत्सर्जन निर्धारित प्रदूषण सीमा के भीतर हैं और जो सरकार के सभी जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं।
उन्होंने परिवहन विभाग से अपील की कि 15 साल की उम्र पूरी कर चुके लेकिन फिट और प्रदूषण मानकों के अनुरूप वाहनों को शहर और KMA क्षेत्रों में चलने की अनुमति दी जाए। ऑपरेटरों ने पूरी बस को स्क्रैप करने के बजाय पुराने इंजनों को बदलने या अपग्रेड करने का विकल्प सुझाया है।
उनका कहना है कि प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की पहचान कर उन पर नियंत्रण के लिए अलग से प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए।
2025 के हाईकोर्ट आदेश का दिया हवाला, देशभर में समान नियम की मांग
बस ऑपरेटरों ने नवंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दी गई सशर्त राहत का भी उल्लेख किया। इसके तहत 15 साल पुराने स्टेज कैरिज बसों को KMA में चलने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते वे साल में दो बार फिटनेस और प्रदूषण जांच में सफल हों। तपन बनर्जी ने कहा कि कमर्शियल पब्लिक ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर इस मुद्दे को लेकर बेहद चिंतित हैं।
उन्होंने अपील की, “सार्वजनिक परिवहन को बचाया जाए।” सिंडिकेट ने यह सवाल भी उठाया कि क्या 15 साल पुराने वाहनों से जुड़ा ऐसा नियम देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागू है। संगठन ने अन्य राज्यों में इस नियम की मौजूदा स्थिति की जानकारी मांगी है।
बनर्जी के मुताबिक, कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी विशेषज्ञों की ओर से पहले भी यह दलील दी गई है कि निर्धारित प्रदूषण मानकों को पूरा करने वाले वाहनों को केवल उनकी उम्र के आधार पर स्क्रैप नहीं किया जाना चाहिए।