कोलकाता : इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) की ओर से बुधवार को कोलकाता में 7वें ICC जेम्स एंड ज्वेलरी समिट-2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आभूषण उद्योग के विकास, वैश्विक बाजार में भारत की संभावनाओं, सोने की बढ़ती कीमतों, बदलती उपभोक्ता पसंद और पारंपरिक कारीगरी के संरक्षण पर चर्चा हुई।
ICC नेशनल एक्सपर्ट कमेटी ऑन ज्वेलरी एंड लाइफस्टाइल के चेयरमैन विनोद बामलवा ने कहा कि भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी क्षेत्र तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात 27.72 अरब डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि उद्योग 2030 तक 75 अरब डॉलर और 2040 तक 100 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
ICC के को-चेयरमैन एवं सेनको गोल्ड लिमिटेड के एमडी व सीईओ सुभंकर सेन ने कहा कि सोने की ऊंची कीमतों के कारण पिछले दो वर्षों में आभूषणों की मात्रा में 15-17 प्रतिशत की गिरावट आई है। उपभोक्ता हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बंगाल के पारंपरिक कारीगरों और उनकी कला को संरक्षित करने की जरूरत पर जोर दिया।
पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग से राज्य में एक स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए आवश्यक सहयोग और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने को तैयार है। उन्होंने उद्योग से सरकारी आईटीआई के साथ जुड़कर अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की अपील की।
वहीं, IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने घरेलू स्तर पर रिफाइंड सोने को ETF में शामिल करने की वकालत की। IIBX के एमडी एवं सीईओ अशोक गौतम ने बताया कि दिवाली तक कोलकाता के माणिकम SEZ में IIBX का अपना वॉल्ट शुरू करने की योजना है।
GJEPC के पूर्वी क्षेत्र के सह-संयोजक प्रकाश च. पिंचा और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत क्षेत्रीय सीईओ सचिन जैन ने भी भारतीय कारीगरी, घरेलू सोना, विनिर्माण और निर्यात क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया।