कोलकाता : 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी लोकसभा सांसदों के राजनीतिक भविष्य पर बड़ा फैसला आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दल-बदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) के तहत उनकी स्थिति पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि लोकसभा सचिवालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुन ली हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर कानूनी राय भी ली जा रही है। बागी सांसदों ने नवगठित नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल होने के बाद लोकसभा में अलग संसदीय मान्यता देने की मांग की है।
सूत्रों का कहना है कि यह मामला अभूतपूर्व है, क्योंकि संसद के इतिहास में पहली बार किसी गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दल के संसदीय समूह को मान्यता देने और अलग सीट आवंटित करने का प्रश्न सामने आया है। ऐसे में सभी कानूनी और प्रक्रियागत पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है।
इस बीच, मामले से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए लोकसभा सचिवालय को बड़ी संख्या में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के आवेदन भी मिले हैं। माना जा रहा है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले आने वाला यह फैसला न केवल टीएमसी, बल्कि संसदीय राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।