गोदाम मालिक समेत 5 गिरफ्तार, जांच के लिए 6 सदस्यीय एसआईटी गठित
कोलकाता : तारातला थानांतर्गत ट्रांसपोर्ट डिपो रोड स्थित निर्माणाधीन गोदाम की छत ढहने की घटना में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। वहीं, मलबे में 18 घंटे तक फंसे रहे एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया। कुल 19 घायलों का इलाज एसएसकेएम अस्पताल में चल रहा है। मृतकों की पहचान कृष्ण चौधरी, रोहित चौधरी, चंद्रमा चौधरी, राहुल चौधुरी, पप्पू कुमार रजक, घी कुमार, असगर हुसैन, साहिल सरदार, हसन इमाम, गणेश कालांडी और नवीन सिंह के रूप में हुई है। घायलों के नाम दुर्वासा मल्लाह, मणिचंद कुमार, शाहिद कुमार, विश्व प्रकाश, राजेश रुईदास, बोदन मुंडा, राजेंद्र राव, रामप्रसाद चौधरी, मोहम्मद आबिद खान, सूरज चौधरी, जौहर अली गायेन, देवाशीष दास, अरमान खान उर्फ मोहम्मद सोनू, संदीप पांडे, मुस्तकिन गायेन, राजकुमार रजक, कार्तिक पात्र, खालेक सरदार और मन्नू कुमार हैं। इस बीच पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए गोदाम मालिक शंभुनाथ बेहरा, सुपरवाइजर गुलजार हुसैन, कमल सामंत, लेबर कांट्रेक्टर दिवाकर भंडारी और सैंक्शन प्लान के ब्रोकर अब्दुल हामिद सहित 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की तह तक जाने के लिए लालबाजार के डीडी (डिटेक्टिव डिपार्टमेंट) के अधिकारियों की अगुवाई में 6 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। गुरुवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। गुरुवार की शाम पुलिस ने पूर्व मेयर के ओएसडी एवं एमपी लैड के कंट्रोलिंग ऑफिसर कालीचरण बनर्जी को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।
14 घंटे बाद मौत के मुंह से लौटी एक जिंदगी
आपदा के बीच गुरुवार की सुबह एक चमत्कारिक घटना भी देखने को मिली। मलबे के नीचे करीब 14 घंटे तक लोहे की भारी बीम के सहारे फंसा एक व्यक्ति जीवित पाया गया। उसे सुरक्षित निकाल लिया गया है और राहत की बात यह है कि उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है। उसे तुरंत एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मौसम ने पैदा की बड़ी चुनौतियां
गुरुवार की सुबह मौसम साफ होने पर तीन हाइड्रोलिक क्रेन और अर्थ मूवर्स की मदद से गैस कटर और फावड़ों के जरिए मलबा हटाने का काम तेज किया गया। भीषण गर्मी और उमस के चलते बचावकर्मियों को बार-बार अपनी टीमें बदलनी पड़ीं। दोपहर बाद अचानक मौसम ने फिर करवट ली। तेज हवाओं, आंधी और बारिश के कारण क्रेन की ऊंचाई पर संचालन असुरक्षित हो गया, जिसके चलते अधिकारियों को अभियान अस्थाई रूप से रोकना पड़ा। मलबे में अब भी कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका है। राज्य के मंत्री इंद्रनील खां ने गुरुवार की सुबह घटनास्थल का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की। मौके पर ही एक अस्थाई मेडिकल कैंप स्थापित किया गया है, ताकि मलबे से निकलने वाले घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार देकर एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा जा सके। गुरुवार की दोपहर मौसम साफ होते ही दोबारा तेज गति से राहत व बचाव कार्य किया गया। घटनास्थल पर 36 घंटे बाद भी रेस्कयू ऑपरेशन जारी है।