पूजा पंडाल हटाने की समय-सीमा खत्म 
कोलकाता सिटी

साल्टलेक में पूजा पंडाल हटाने की समय-सीमा खत्म

अधिकांश क्लबों ने नहीं खाली किए पार्क

Ravi

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के साल्टलेक और राजारहाट-गोपालपुर इलाके में दुर्गा पूजा के बाद भी अधिकांश पूजा समितियां अपने पंडालों को पूरी तरह नहीं हटा सकी हैं। बिधाननगर नगर निगम (BMC) की ओर से पार्कों और मैदानों को खाली करने के लिए निर्धारित बुधवार की समय-सीमा समाप्त हो गई, लेकिन कई स्थानों पर पंडालों के ढांचे अब भी मौजूद हैं।

इसके अलावा, सड़कों के किनारे लगाए गए अस्थायी बैनर और होर्डिंग भी कई जगहों पर नहीं हटाए गए हैं। नगर निगम के निर्देशों के मुताबिक, समय पर मैदान खाली नहीं करने वाली समितियों को अतिरिक्त शुल्क और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

समय-सीमा के बाद भी पार्कों में मौजूद हैं पंडाल

दुर्गा पूजा के दौरान बिधाननगर नगर निगम और शहरी विकास विभाग के अधीन पार्कों तथा खाली भूखंडों पर कई पूजा पंडाल बनाए गए थे। पूजा समाप्त होने के बाद इन्हें हटाने का काम शुरू हुआ, लेकिन अधिकांश समितियां निर्धारित समय तक परिसर खाली नहीं कर सकीं।

कुछ समितियों ने पंडालों को खोलना शुरू कर दिया है, जबकि कई जगहों पर निर्माण का सामान और ढांचे अब भी पड़े हुए हैं। इससे सार्वजनिक पार्कों और मैदानों को सामान्य उपयोग के लिए उपलब्ध कराने में देरी हो रही है।

लक्ष्मी पूजा के कारण पंडाल हटाने में हुई देरी

पूजा आयोजकों का कहना है कि रविवार को लक्ष्मी पूजा होने के कारण पंडालों को हटाने की प्रक्रिया में समय लगा। साल्टलेक की एक पूजा समिति के आयोजक ने बताया कि पंडाल खोलने का काम शुरू कर दिया गया था, लेकिन बुधवार तक पूरे मैदान को खाली करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

उन्होंने जरूरत पड़ने पर निर्धारित शुल्क देने की बात भी कही। वहीं, बीडी ब्लॉक की पूजा समिति ने अपना मुख्य पंडाल दशमी के तुरंत बाद हटा दिया था, क्योंकि लक्ष्मी पूजा छोटे पंडाल में आयोजित की गई थी।

देरी पर रोजाना शुल्क और बैनर नहीं हटाने पर जुर्माना

बिधाननगर नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी पार्कों में पंडाल रहने पर आयोजकों से रोजाना मैदान बुकिंग शुल्क लिया जा सकता है। अस्थायी बैनर और होर्डिंग नहीं हटाने पर भी जुर्माने का प्रावधान है।

प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों को जल्द खाली कराना और सड़कों तथा पार्कों को व्यवस्थित रखना है। अब पूजा समितियों को पंडालों के शेष ढांचे और प्रचार सामग्री हटाने के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है, जिसके दौरान उन्हें नगर निगम के नियमों के अनुसार शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

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