कोलकाता : राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में जारी उठापटक के बीच माकपा ने अपने सदस्यों के लिए सख्त निर्देश जारी किया है।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि तृणमूल कांग्रेस या भाजपा के सदस्यों के साथ गठजोड़ कर पंचायत, पंचायत समिति या जिला परिषद का बोर्ड कब्जे में नहीं लिया जा सकता। ऐसा करने वाले पार्टी सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, यहां तक कि निलंबन भी किया जा सकता है।
बुधवार को हुई माकपा सचिव मंडल की बैठक में पंचायत बोर्डों को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। नेतृत्व ने जिला कमेटियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तृणमूल या भाजपा के साथ मिलकर बोर्ड पर कब्जा करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, कांग्रेस, ISF या अन्य वामपंथी दलों के साथ मिलकर बोर्ड बनाने पर पार्टी को आपत्ति नहीं है।
मुर्शिदाबाद की डोमकल पंचायत समिति में हाल ही में कांग्रेस और माकपा सदस्यों ने मिलकर तृणमूल संचालित बोर्ड के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। मतदान में जीत के बाद दोनों दलों ने बोर्ड पर कब्जा कर लिया। माकपा नेतृत्व ने इस मामले पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
माकपा केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि तृणमूल के समय पंचायत चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से नहीं हुए थे। सत्ता परिवर्तन के बाद त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लगभग महत्वहीन हो गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी मौजूदा राजनीतिक “उथल-पुथल” का हिस्सा नहीं बनेगी।