मुस्ताफिजुर रहमान 
कोलकाता सिटी

पंचायत संशोधन विधेयक पर माकपा का हमला

लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती का आरोप

कोलकाता : राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित 'द वेस्ट बंगाल पंचायत (सेकेंड अमेंडमेंट) बिल, 2026' को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। माकपा विधायक मुस्ताफिजुर रहमान ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इससे पंचायत व्यवस्था की लोकतांत्रिक संरचना कमजोर होगी और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकार सीमित हो जाएंगे।

विधानसभा की कार्यवाही के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुस्ताफिजुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की थी, जिसमें वित्तीय अधिकार पंचायत प्रधानों के पास थे। उनका आरोप है कि पिछले 15 वर्षों में इन अधिकारों को धीरे-धीरे अधिकारियों के हाथों में सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसे अब यह विधेयक कानूनी रूप देने जा रहा है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार ग्राम पंचायत निधि से भुगतान संबंधी आदेश पर कार्यकारी सहायक (एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट) के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। चेक पर कार्यकारी सहायक और सचिव संयुक्त रूप से हस्ताक्षर करेंगे। साथ ही मासिक आय-व्यय का विवरण प्रधान और बीडीओ को सौंपने की जिम्मेदारी भी कार्यकारी सहायक की होगी।

मुस्ताफिजुर ने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हुआ तो पंचायतों की स्वायत्तता प्रभावित होगी और विकास कार्यों पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताते हुए सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की।

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