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जोड़ासांको : गलत 'रणनीति' ने डुबोई विजय उपाध्याय की लुटिया

भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, वहीं उत्तर कोलकाता की जोड़ासांको विधानसभा सीट के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस के इस अप्रत्याशित पतन के पीछे अब सबसे बड़ा कारण वार्ड नंबर 42 के पार्षद महेश शर्मा की भूमिका को माना जा रहा है।

महेश शर्मा के 'चक्रव्यूह' में फंसे उम्मीदवार

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और जमीनी कार्यकर्ताओं का स्पष्ट आरोप है कि तृणमूल उम्मीदवार विजय उपाध्याय की हार की पटकथा महेश शर्मा की गलत सलाहों से लिखी गई। चर्चा है कि विजय उपाध्याय पूरी तरह से महेश शर्मा के घेरे में रहे। महेश शर्मा ने न केवल चुनावी रणनीतियों पर एकाधिकार जमाया, बल्कि अपने निजी स्वार्थ के लिए उम्मीदवार को जमीनी हकीकत से कोसों दूर रखा। आलम यह रहा कि महेश शर्मा खुद अपने वार्ड में पार्टी को बढ़त दिलाने में नाकाम रहे।

पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी पड़ी भारी

सबसे गंभीर आरोप यह है कि महेश शर्मा के कहने पर विजय उपाध्याय ने तृणमूल के उन पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की, जो दशकों से इस क्षेत्र में पार्टी की रीढ़ रहे हैं। हाईकमान का सख्त निर्देश था कि पुराने विधायक और अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चुनाव लड़ा जाए, लेकिन महेश शर्मा की सलाह पर उन्हें चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह हटा दिया गया। पुराने सिपाहियों को दूर रखने का नतीजा यह हुआ कि संगठन में बिखराव पैदा हो गया और पार्टी को भितरघात का सामना करना पड़ा। आरोप है कि तत्कालीन विधायक विवेक गुप्त वर्ष 2021 में 12743 वोटों से विजयी हुए थे। उस समय विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल के संगठन के विभिन्न विंग के सदस्यों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। इस प्रकार की गलत रणनीति का नतीजा यह हुआ कि इस बार तृणमूल उम्मीदवार को 5797 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।

अवैध पार्किंग माफिया के चंगुल में फंस गये थे तृणमूल उम्मीदवार

सिर्फ वार्ड नं. 42 ही नहीं बल्कि वार्ड नं. 22 में अवैध पार्किंग माफिया के चंगुल में भी तृणमूल उम्मीदवार फंस गये थे। उक्त पार्किंग माफिया ने वार्ड नं. 22 से तृणमूल को बढ़त दिलाने का वादा किया था लेकिन नतीजे आये तो तृणमूल वहां से रिकॉर्ड वोटों से पिछड़ी हुई थी। ये लोग अपने धंधे को चलाने के लिए उल्लू सीधा करने में लगे थे। इलाके में इनकी धाक का इससे पता लगाया जा सकता है कि वे अपनी गली में भी उम्मीदवार को ज्यादा वोट नहीं दिला सके।

हार के बाद फूटने लगा आक्रोश

जोड़ासांको की जनता और तृणमूल समर्थक अब खुलकर बोल रहे हैं कि महेश शर्मा ने अपने व्यक्तिगत हित के लिए पार्टी की जीत की संभावनाओं को दांव पर लगा दिया। पार्षद के वार्ड में पार्टी की हार ने उनके खोखले दावों की पोल खोल दी है। पार्टी के भीतर अब यह मांग उठने लगी है कि महेश शर्मा के कार्यकाल और चुनाव के दौरान उनके द्वारा लिए गए संदिग्ध फैसलों की उच्च स्तरीय जांच हो। आने वाले दिनों में इस हार का असर वार्ड की राजनीति और संगठन के ढांचे पर दिखना तय माना जा रहा है।

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