कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टिंग (Contrarian Investing) :
इस रणनीति में निवेशक बाजार में प्रचलित आम धारणा के विपरीत निवेश करने का फैसला करता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी सेक्टर या कंपनी से ज्यादातर निवेशक दूरी बना रहे हैं, तो कॉन्ट्रेरियन निवेशक उस कंपनी या सेक्टर में निवेश का अवसर तलाश सकता है।
हालांकि, ऐसे निवेशक केवल दूसरों की राय के खिलाफ जाने के लिए निवेश नहीं करते। वे कंपनी और सेक्टर पर गहन रिसर्च करते हैं और यह जांचते हैं कि भविष्य में उसमें सुधार या तेजी आने की वास्तविक संभावना है या नहीं।
स्मॉल और माइक्रो-कैप इन्वेस्टिंग
इस रणनीति में निवेशक बहुत छोटी कंपनियों में निवेश पर ध्यान देते हैं। ऐसी कंपनियों का चयन बड़ी कंपनियों के मुकाबले अलग तरीके से किया जाता है।
इन निवेशकों में कर्ज का स्तर, शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव, कारोबार की असंगतता और अपेक्षाकृत कम पारदर्शिता जैसे जोखिमों को सहने की क्षमता अधिक हो सकती है। छोटी कंपनियों में तेजी की संभावना अधिक हो सकती है, लेकिन इनके साथ जोखिम भी काफी ज्यादा होता है।
इसलिए स्मॉल और माइक्रो-कैप निवेश को अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाला निवेश माना जाता है।
कुल मिलाकर, निवेश की अलग-अलग रणनीतियां निवेशक के लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और बाजार की समझ पर निर्भर करती हैं। ऊपर बताई गई रणनीतियों के अलावा भी निवेश की कुछ अन्य रणनीतियां हैं, हालांकि उनका इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम किया जाता है।