कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सरकारी परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों ने राज्य सरकार से करीब 50,000 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान को जल्द जारी करने की मांग की है।
ठेकेदारों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान अटके रहने के कारण निर्माण क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कई कंपनियों के लिए रोजमर्रा का कामकाज चलाना मुश्किल हो रहा है। यह बकाया सड़क, भवन, नागरिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्टों का बताया जा रहा है।
ठेकेदारों के मुताबिक कई परियोजनाओं में काम पूरा होने या प्रगति के बावजूद उनके बिलों का भुगतान समय पर नहीं हो पाया है। लगातार बढ़ते बकाये के चलते ठेकेदारों को अपने स्तर पर मजदूरों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ रहा है। इससे उनकी कार्यशील पूंजी पर सीधा असर पड़ा है।
ठेकेदारों का कहना है कि यदि लंबित रकम का भुगतान जल्द नहीं किया गया तो इसका असर निर्माण गतिविधियों और चल रही सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार पर भी पड़ सकता है।
सरकारी ठेकों से जुड़े कारोबार में बड़ी संख्या में मजदूर, छोटे आपूर्तिकर्ता और अन्य कारोबारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं। ठेकेदारों ने बताया कि सरकार से भुगतान में देरी का असर इस पूरी श्रृंखला पर पड़ता है। समय पर राशि नहीं मिलने से मजदूरों का भुगतान, निर्माण सामग्री की खरीद और दूसरी जरूरी देनदारियां प्रभावित हो सकती हैं।
ठेकेदारों का तर्क है कि सरकारी परियोजनाओं के भुगतान में तेजी आने से न केवल उनका वित्तीय दबाव कम होगा, बल्कि संबंधित श्रमिकों और छोटे कारोबारियों को भी राहत मिलेगी।
ठेकेदारों ने राज्य प्रशासन से लंबित बिलों की प्रक्रिया तेज करने और बकाया राशि जल्द जारी करने की अपील की है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान होने से निर्माण एजेंसियां मौजूदा परियोजनाओं को बिना वित्तीय रुकावट के आगे बढ़ा सकेंगी।
ठेकेदारों के अनुसार निर्माण क्षेत्र राज्य में रोजगार का एक बड़ा स्रोत है। ऐसे में करीब 50 हजार करोड़ रुपये के बकाये का समाधान होने से परियोजनाओं की गति बनाए रखने के साथ-साथ इससे जुड़े हजारों कामगारों और कारोबारियों को भी राहत मिल सकती है।