कोलकाता: राज्य के स्थापना दिवस को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए 20 जून 1947 को राज्य का स्थापना दिवस मानने की वकालत की है।
शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद वे भवानीपुर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के इतिहास में 20 जून 1947 एक महत्वपूर्ण दिन है और इसे ही राज्य के स्थापना दिवस के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
शुभेंदु ने कहा कि पश्चिम बंगाल को भारत के मानचित्र में शामिल करने में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा, “श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारतीय सेवाश्रम के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के संघर्ष के कारण यह संभव हुआ। विधानसभा में 58 सदस्यों ने मतदान कर पश्चिम बंगाल को भारत में शामिल किया था।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि यह ऐतिहासिक निर्णय नहीं लिया गया होता, तो आज की स्थिति अलग हो सकती थी। उनके अनुसार, उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की बैठक में लाएंगे और इस पर औपचारिक चर्चा कराई जाएगी।
साथ ही उन्होंने कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता और इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार हमेशा पयला बैशाख यानी बंगाली नववर्ष के पहले दिन को राज्य स्थापना दिवस के रूप में मनाती रही है। भाजपा इसका लगातार विरोध करती रही है।
अब नई सरकार इस निर्णय को आगे बढ़ाते हुए इसे आधिकारिक रूप देने की दिशा में कदम उठा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थापना दिवस को लेकर यह नया विवाद आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक गर्मा सकता है तथा सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है।