कोलकाता : सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में जारी छात्र आंदोलन के बीच संस्थान प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने 13 नवंबर 2026 तक नियमित कक्षाएं स्थगित करने के साथ विद्यार्थियों को 24 घंटे के भीतर छात्रावास और परिसर खाली करने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जारी इस आदेश से संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने रहने और पढ़ाई को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। संस्थान के फिल्म विंग और इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया (ईडीएम) विंग की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां अगले आदेश तक बंद रहेंगी।
प्रशासन ने जारी किया नया आदेश
संस्थान के रजिस्ट्रार दीपक कुमार ने शुक्रवार शाम छह बजे यह निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया है कि आगामी त्योहारों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
सभी विद्यार्थियों को आदेश जारी होने के 24 घंटे के भीतर छात्रावास सहित संस्थान परिसर में मौजूद अन्य स्थानों को खाली करने को कहा गया है। इसके साथ ही छात्रावास की मेस सेवाएं भी 13 नवंबर तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
छात्र आंदोलन के बीच बढ़ा तनाव
एसआरएफटीआई में पिछले कई दिनों से छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विवाद 27 सितंबर को एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर बैनरों को नुकसान पहुंचाने और उसके बाद आरएसएस से जुड़े एक संगठन के कार्यकर्ताओं तथा छात्रों के बीच हुई झड़प के बाद बढ़ा था।
इसके बाद विद्यार्थियों ने उपकुलपति संतोष अजमेरा के इस्तीफे और अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया। छात्रों के विरोध के बीच छह विद्यार्थियों को संस्थान से निष्कासित किए जाने की खबर ने भी विवाद को बढ़ाया है।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का जानबूझकर उल्लंघन करने या संस्थान के कामकाज में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक अथवा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
डीन, विभागाध्यक्षों, छात्रावास वार्डनों और सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें आदेश के उल्लंघन की घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार कर संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करने को भी कहा गया है।
इस फैसले से उन विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है, जो दूसरे राज्यों से आकर यहां पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने आदेश में फैसले का कारण त्योहारों और प्रशासनिक जरूरतों को बताया है, लेकिन आंदोलन के बीच इस कदम से संस्थान में तनाव और बढ़ने की आशंका है।