फाइल फोटो 
कोलकाता सिटी

एक रिकॉर्ड जो खोल सकता है 32 लापता पर्यटकों का राज

नेपाल से एग्जिट की पुष्टि, लेकिन चीन में एंट्री का इंतजार

परिवारों की नजर अब चीनी इमिग्रेशन सूची पर

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : उन्हें पता है कि उनके माता-पिता, दोस्त और रिश्तेदार नेपाल से कब निकले थे लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि वे कभी चीन पहुंच पाए या नहीं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा जारी इमिग्रेशन रिकॉर्ड से पता चलता है कि ‘चलो जाई ट्रैवल क्लब’ के साथ यात्रा कर रहे बंगाल के सभी 32 पर्यटकों ने बुधवार की सुबह रसुवागढ़ी में नेपाल का इमिग्रेशन क्लियर कर लिया था। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है, जिससे यह पता चले कि वे चीन की सीमा में दाखिल हुए थे या नहीं। परिवारों के लिए जानकारी की यही कमी उन 32 पर्यटकों की तलाश में सबसे अहम सवाल बन गई है, जिनका नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल पाया है।

रिकॉर्ड के मुताबिक, शुभाश्री चक्रवर्ती समूह की पहली सदस्य थीं, जिन्हें सुबह 8:08 बजे नेपाल इमिग्रेशन से एग्जिट स्टैम्प मिला था। टूर मैनेजर जयंत सान्याल आखिरी व्यक्ति थे, जिन्हें सुबह 8:24 बजे स्टैम्प मिला। भोटे कोशी नदी पर बना फ्रेंडशिप ब्रिज नेपाल के इमिग्रेशन पॉइंट को चीन की ओर से जोड़ता है। पर्यटकों को पुल पार करने के बाद इमिग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी करनी थीं और फिर तिब्बत के केरुंग शहर के लिए बस लेनी थी। वहां उन्हें अपनी यात्रा आगे जारी रखने से पहले एक दिन रुककर माहौल के अनुकूल होना था।

नेपाल के समय के अनुसार सुबह करीब 8:45 बजे सीमावर्ती इलाके में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे पुल बह गया और चीनी इमिग्रेशन दफ्तर को भी नुकसान पहुंचा। ट्रैवल एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हो सकता है कि कुछ सदस्य पहले ही बस में चढ़ गए हों, जबकि कुछ पुल पार कर रहे हों या दूसरों का इंतजार कर रहे हों। हमें बस यह नहीं पता कि उन करीब 20 मिनटों में क्या हुआ।’

यही समय अब परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या बाढ़ आने से पहले कोई पर्यटक चीनी इमिग्रेशन से गुजर पाया था? इस रास्ते से परिचित लोगों का कहना है कि इमिग्रेशन की प्रक्रिया में कई घंटे लग सकते हैं। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि क्या समूह ने बाढ़ आने से पहले औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं और उस इलाके से आगे निकल पाया था।

परिवार अब खुद इस जानकारी की कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे भारतीय और चीनी मिशनों, नेपाल के अधिकारियों, पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों में फोन कर रहे हैं। कुछ लोग प्रभावित इलाके के आसपास के गांवों के लोगों से भी संपर्क कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिजन अस्पतालों, बचाव केंद्रों और यहां तक कि मुर्दाघरों में अपने रिश्तेदारों की तलाश के लिए नेपाल जाने की तैयारी कर रहे हैं।

शुक्रवार की रात मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक ऑनलाइन बैठक के दौरान अंकिता ने सरकार से चीन की ओर से बचाए गए भारतीयों के नाम जारी करने की मांग की। अंकिता के माता-पिता, दुर्गापुर के मौसुमी और अरिंदम गांगुली भी इसी समूह के साथ यात्रा कर रहे थे। राजर्षि रॉय चौधरी के लिए नेपाल का इमिग्रेशन रिकॉर्ड एक सवाल का जवाब तो देता है, लेकिन साथ ही एक और सवाल खड़ा करता है। उनके माता-पिता, न्यू टाउन के देबब्रत रॉय चौधरी और लेखा रॉय चौधरी भी इस समूह का हिस्सा थे।

आपदा की खबर सुनकर दिल्ली से कोलकाता लौटे राजर्षि ने कहा, ‘हमें पता है कि वे नेपाल इमिग्रेशन सेंटर से निकल गए थे। उनके बारे में हमारे पास यही आखिरी पक्की जानकारी है।’ एक अन्य रिश्तेदार ने बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में बाढ़ से पहले चेतावनी वाले सायरन सुनाई देने और लोगों को ऊंचे इलाकों की ओर जाते हुए देखा गया था। परिवार चाहता है कि बचाव दल यह भी जांच करे कि क्या लापता पर्यटकों में से कोई उन इलाकों तक पहुंच पाया था।

परिवारों को कुछ जवाब मिलने की उम्मीद उस समय जगी, जब विदेश मंत्रालय (MEA) ने तिब्बत से नेपाल वापस लाए गए 149 भारतीय पर्यटकों की सूची जारी की। हालांकि, इनमें कोलकाता का कोई नाम नहीं था। अब परिजन उस एक रिकॉर्ड का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उन्हें लगता है कि यह रहस्य सुलझ सकता है और वह रिकॉर्ड है चीनी इमिग्रेशन सूची।

देबाशीष ठाकुर के छह दोस्त भी लापता लोगों में शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘अब हमें पता है कि वे नेपाल से बाहर निकल गए थे, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, यह हमें नहीं पता। अगर चीनी इमिग्रेशन रिकॉर्ड जारी किए जाते हैं, तो कम से कम हमें यह पता चल जाएगा कि क्या वे दूसरी तरफ पहुंच पाए थे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उनकी आखिरी लोकेशन इमिग्रेशन ऑफिस के पास मिली थी। अगर अचानक आई बाढ़ के समय वे वहीं थे, तो सिर्फ कोई चमत्कार ही उन्हें बचा सकता है।’

तब तक परिवार इस उम्मीद को बनाए हुए है कि शायद पर्यटक बाढ़ वाले इलाके से दूर कहीं सुरक्षित हों। वे किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क या पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके बारे में कोई जानकारी दे सके। हालांकि, उनका मानना है कि उम्मीद तेजी से खत्म होती जा रही है।


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