कोलकाता : सेंट्रल कोलकाता के होटल और गेस्ट हाउस संचालकों पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है। फायर लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया में देरी और सुरक्षा मानकों को लेकर जारी कार्रवाई के बीच करीब 200 होटल व गेस्ट हाउस संचालक अब कानूनी रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
संचालकों का दावा है कि कई प्रतिष्ठानों में लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा चुका है, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बावजूद उन्हें बंद करने के आदेश दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह की ‘सामूहिक बंदी’ से हजारों कर्मचारियों और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
2,500 से 3,000 कमरों पर बंदी का असर
प्रभावित होटल और गेस्ट हाउसों में कुल मिलाकर करीब 2,500 से 3,000 कमरे हैं। न्यू मार्केट, सेंट्रल कोलकाता और आसपास के इलाकों में कार्रवाई के बाद होटल कारोबारियों में भारी असमंजस है। संचालकों का कहना है कि अचानक बंदी के आदेश से न केवल उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि पहले से बुकिंग करा चुके ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
होटल मालिक बोले- नियमों का पालन चाहते हैं, लेकिन समय भी मिले
होटल कारोबारियों का कहना है कि वे अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन के खिलाफ नहीं हैं। उनका मुख्य विरोध उन मामलों में है, जहां फायर लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बावजूद प्रक्रिया पूरी होने में प्रशासनिक देरी हो रही है।
उनका तर्क है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में कमियां हैं तो उन्हें दूर करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए, न कि तत्काल कारोबार बंद करा दिया जाए। इसी मुद्दे को लेकर कई संचालक अदालत का रुख करने की तैयारी में हैं।
यह कार्रवाई सेंट्रल कोलकाता के एक होटल में भीषण आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद तेज हुई है। इसके बाद केएमसी और दमकल विभाग ने होटल व गेस्ट हाउसों की सुरक्षा जांच बढ़ा दी है। पिछले छह दिनों में करीब 200 प्रतिष्ठानों को बंदी के नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन का जोर अग्नि सुरक्षा और भवन नियमों के पालन पर है, जबकि होटल संचालक प्रक्रिया में देरी और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। अब मामला कानूनी चुनौती तक पहुंचने की संभावना से सेंट्रल कोलकाता के होटल कारोबार पर संकट और गहरा गया है।