कोलकाता सिटी

विरासत से विकास तक: डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बताया सतत व्यवसाय का मंत्र

Calcutta Chamber of Commerce में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का विशेष सत्र

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : Calcutta Chamber of Commerce ने एक विशेष सत्र का आयोजन किया, जिसमें Lakshyaraj Singh Mewar, मेवाड़ राजघराने के 77वें संरक्षक एवं HRH Group of Hotels के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ने विरासत आधारित संस्थाओं को सतत और आधुनिक व्यवसायों में परिवर्तित करने पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की शुरुआत चैंबर के अध्यक्ष अनंत साहारिया के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि विरासत विश्वास, लचीलापन और विशेषज्ञता का निर्माण करती है, लेकिन इसे स्थिर नहीं रहना चाहिए। इसे समय के साथ विकसित और अनुकूलित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मेवाड़ की यात्रा 21वीं सदी में विरासत को प्रासंगिक बनाने का प्रेरणादायक उदाहरण है।

अपने संबोधन में डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि किसी भी विरासत-आधारित संगठन को दीर्घकालिक सफलता के लिए परंपरा और आधुनिक पेशेवर उत्कृष्टता के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता के लिए अपनी जड़ों, संस्कृति और समुदाय का सम्मान करना जरूरी है, साथ ही भविष्य की तकनीकों को अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि परिवर्तन तब शुरू होता है जब हम अतीत की बुद्धिमत्ता को भविष्य की तकनीकी और नैतिक आवश्यकताओं से जोड़ते हैं। ऐतिहासिक संपत्तियों की मूल पहचान को संरक्षित रखते हुए उन्हें सेवा-उन्मुख और समृद्ध संस्थानों में बदलना ही सतत विकास का मार्ग है। इसके लिए सक्रिय नेतृत्व, टीम का निरंतर प्रशिक्षण और उपयुक्त तकनीक का सावधानीपूर्वक उपयोग आवश्यक है।

अपने प्रेरक शब्दों में उन्होंने कहा, “जीवन से केवल गुजरना नहीं, बल्कि जीवन में निरंतर बढ़ना ही लक्ष्य होना चाहिए। खुद को साबित करने के बजाय खुद को बेहतर बनाना अधिक महत्वपूर्ण है।” बातचीत के दौरान उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि मेवाड़ ने सदियों पहले ही स्वतंत्रता और स्वाभिमान की लड़ाई का नेतृत्व किया था।

कार्यक्रम का संचालन चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मनोज मोहांका ने किया। उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए डॉ. मेवाड़ की दूरदर्शी सोच की सराहना की।

इस सत्र में उपस्थित प्रतिभागियों को आज के प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल में पारिवारिक और ऐतिहासिक उद्यमों को नवाचार एवं जिम्मेदार प्रबंधन के माध्यम से सफल बनाने के महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्राप्त हुए।

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