कोलकाता सिटी

सीएए की नयी डेडलाइन : बदल सकते हैं सियासी समीकरण

पश्चिम बंगाल में मतुआ प्रभावित विधानसभा सीटें : 85-90

कोलकाता : केंद्र सरकार के ‘इमिग्रेशन एण्ड फॉरेनर्स एग्जेम्पशन ऑर्डर 2025’ के बाद बंगाल के मतुआ समुदाय ने राहत की सांस ली। उनके समुदाय के सदस्य, खासकर हिंदू, जो 31 दिसंबर, 2024 से पहले देश में प्रवेश कर चुके हैं, अब सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस कदम से 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। मतुआ और अन्य शरणार्थी, खासकर हिंदू, जो 2014 के बाद भारत आए थे, अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित थे क्योंकि सीएए ने नागरिकता के लिए पात्रता को केवल उन लोगों तक सीमित कर दिया था जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए थे। अब ये सीमा बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2024 कर दी गयी है।

31 दिसम्बर 2024 तक बढ़ी डेडलाइन

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। पिछले साल लागू हुए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के अनुसार, 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए इन उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जा रही थी जिसकी मियाद अब बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2024 कर दी गयी है।

यह भाजपा का चुनावी प्रोपेगंडा : ममता बाला ठाकुर

तृणमूल की राज्यसभा सांसद व ऑल इंडिया मतुआ महासंघ की संघाधिपति ममता बाला ठाकुर ने सन्मार्ग से कहा, ‘यह सब भाजपा का चुनावी प्रोपेगंडा है और चुनाव के लिए किया जा रहा है। अगले साल विधानसभा चुनाव है और यह सब कर भाजपा को लगता है कि वह जीत जायेगी जबकि ऐसा नहीं होगा। हमें नागरिकता चाहिये, लेकिन इसके लिए हम किसी तरह का दस्तावेज दिखाने को मजबूर नहीं है। हमारी मांग है कि मतुआ समुदाय में जिनके पास भी वोटर कार्ड, पैन कार्ड व आधार हैं, उन्हें इस देश का नागरिक घोषित किया जाये। इस संबंध में बिल पास करवाना होगा और इसके लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’

एक भी हिन्दू नहीं जायेगा बाहर : सुकांत मजूमदार

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने सीएए की डेडलाइन बढ़ाने के मुद्दे पर कहा कि एक भी हिन्दू पश्चिम बंगाल के बाहर नहीं जायेगा। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल से एक भी हिन्दू बाहर नहीं जायेगा। देश का कानून है कि 11 वर्षों तक भारत में रहने के बाद स्वतः व्यक्ति देश का नागरिक बन जायेगा। हमारी मांग है कि ऐसे मामलों में भी सीएए के तहत नागरिकता दी जाये।’

यह भाजपा का चुनावी प्रोपेगंडा : ममता बाला ठाकुर

तृणमूल की राज्यसभा सांसद व ऑल इंडिया मतुआ महासंघ की संघाधिपति ममता बाला ठाकुर ने सन्मार्ग से कहा, ‘यह सब भाजपा का चुनावी प्रोपेगंडा है और चुनाव के लिए किया जा रहा है। अगले साल विधानसभा चुनाव है और यह सब कर भाजपा को लगता है कि वह जीत जायेगी जबकि ऐसा नहीं होगा। हमें नागरिकता चाहिये, लेकिन इसके लिए हम किसी तरह का दस्तावेज दिखाने को मजबूर नहीं है। हमारी मांग है कि मतुआ समुदाय में जिनके पास भी वोटर कार्ड, पैन कार्ड व आधार हैं, उन्हें इस देश का नागरिक घोषित किया जाये। इस संबंध में बिल पास करवाना होगा और इसके लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’

एक भी हिन्दू नहीं जायेगा बाहर : सुकांत मजूमदार

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने सीएए की डेडलाइन बढ़ाने के मुद्दे पर कहा कि एक भी हिन्दू पश्चिम बंगाल के बाहर नहीं जायेगा। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल से एक भी हिन्दू बाहर नहीं जायेगा। देश का कानून है कि 11 वर्षों तक भारत में रहने के बाद स्वतः व्यक्ति देश का नागरिक बन जायेगा। हमारी मांग है कि ऐसे मामलों में भी सीएए के तहत नागरिकता दी जाये।’

बांग्लादेश में तनाव के समय काफी हिन्दू आये यहां : माहितोष बैद्य

ऑल इंडिया मतुआ महासंघ के महासचिव माहितोष बैद्य ने सीएए की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर खुशी जतायी। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में उत्तर व दक्षिण 24 परगना, नदिया, बर्दवान, उत्तर बंगाल के जिलों में लगभग 85-90 विधानसभा सीटों पर मतुआ समुदाय का प्रभाव है। मतुआ की तत्कालीन प्रमुख बड़ो मां यानी बीनापानी देवी के सहयोग से ही टीएमसी की सरकार 2011 में सत्ता में आयी थी। बैद्य ने कहा, ‘हाल में बांग्लादेश में हुई हिंसा व तनाव के समय काफी लोग डर से यहां आये हैं। ऐसे में अब वे भी चाहे तो भारत के नागरिक बन सकते हैं जो काफी बड़ी बात होगी।’

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