कोलकाता : पश्चिम बंगाल के बस और टैक्सी संगठनों ने राज्य सरकार से लंबित जुर्माने (पेनाल्टी) में राहत देने की मांग की है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक दबाव, बढ़ती परिचालन लागत और यात्रियों की संख्या में उतार-चढ़ाव के कारण बड़ी संख्या में वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना बकाया हो गया है।
ऐसे में सरकार को एकमुश्त पेनाल्टी माफी या विशेष राहत योजना लागू करनी चाहिए। संगठनों के प्रतिनिधियों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा कि कई निजी बस और टैक्सी संचालक पहले से ही ईंधन की बढ़ती कीमतों, वाहन रखरखाव, बीमा, परमिट शुल्क और अन्य परिचालन खर्चों से जूझ रहे हैं।
उनका कहना है कि भारी जुर्माने के कारण कई वाहन मालिकों के लिए बकाया राशि जमा करना मुश्किल हो गया है, जिससे कुछ वाहन सड़कों पर नहीं उतर पा रहे हैं। यूनियनों का तर्क है कि यदि सरकार पेनाल्टी में छूट या ब्याज माफी जैसी योजना लागू करती है, तो बड़ी संख्या में वाहन मालिक अपने लंबित कर और शुल्क का भुगतान कर सकेंगे।
इससे सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा और अधिक वाहन सार्वजनिक परिवहन सेवा में वापस आ सकेंगे। संगठनों ने यह भी सुझाव दिया कि एक सीमित अवधि के लिए विशेष निपटान योजना (सेटलमेंट स्कीम) लागू की जाए, ताकि वाहन मालिक बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के अपने बकाया का निपटारा कर सकें।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए बस और टैक्सी संचालकों को वित्तीय राहत देना आवश्यक है। उनका मानना है कि इससे यात्रियों को भी बेहतर और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, परिवहन विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यूनियनों की मांगों पर विचार किया जाएगा और सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा। अब परिवहन क्षेत्र की निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।