कोलकाता : आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से लापता 51 वर्षीय मरीज बिमल घोष का शव करीब 10 दिन बाद कोलकाता पुलिस के मुर्दाघर में मिला। घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था, मरीजों की निगरानी और पुलिस व सरकारी अस्पतालों के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बारानगर निवासी बिमल घोष को बुखार और हृदय संबंधी परेशानी के इलाज के लिए पहले बारानगर स्टेट जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया।
6 अगस्त को आरजी कर में भर्ती होने के बाद 7 अगस्त की सुबह वह लापता हो गए। परिवार ने तत्काल टाला थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
परिवार के अनुसार, शुक्रवार को अस्पताल में मरीज का बिस्तर खाली मिलने के बाद उन्होंने उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। इस दौरान अस्पताल के कर्मचारियों से उन्हें अलग-अलग जवाब मिले।
एक नर्स ने बताया कि मरीज को जांच के लिए ले जाया गया है, जबकि एक वार्ड बॉय ने उसके बाथरूम में होने की बात कही। पास के एक मरीज ने बताया कि उसने बिमल को सुबह करीब 8 बजे आखिरी बार देखा था।
इधर, पुलिस के अनुसार बिमल घोष को 8 अगस्त को कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल के गेट नंबर-2 के पास से बचाया गया था। उन्हें वहां भर्ती कराया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। उस समय उनकी पहचान नहीं हो सकी और शव को पुलिस के मुर्दाघर भेज दिया गया।
परिवार को उनके बारे में सोमवार को जानकारी मिली, जब बउबाजार थाने की पुलिस ने उनसे संपर्क कर एक तस्वीर दिखाई। इसके बाद सामने आया कि जिस मरीज की वे तलाश कर रहे थे, उसकी मौत हो चुकी थी और शव पुलिस के मुर्दाघर में रखा था।
मामले ने अस्पतालों में मरीजों की पहचान, रिकॉर्ड रखने और पुलिस को समय पर सूचना देने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।