वैध कागजात के बावजूद 15 दिन से सैकड़ों वाहन अटके
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
असम-बंगाल सीमा पर कार्बन लदी सैकड़ों गाड़ियों के पिछले करीब 15 दिनों से फंसे होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बक्सीरहाट बॉर्डर पर 250 से अधिक और श्रीरामपुर के पास करीब 100 वाहन खड़े होने का दावा किया जा रहा है। कारोबारियों के अनुसार, वाहनों के लंबे समय से रुके रहने के कारण उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं, ट्रक मालिकों और ड्राइवरों को भी प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पंजाब से आए कई ड्राइवर इन वाहनों के साथ सीमा पर फंसे हुए हैं। उनका कहना है कि कारोबार पूरी तरह ठप पड़ा है और उन्हें अपने परिवार से दूर रहकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि यदि कागजात में कोई कमी है या वाहन में कोई गड़बड़ी है, तो प्रशासन कार्रवाई करे या वाहन को जब्त करे, ताकि वे अपने मालिकों को स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दे सकें। उनका आरोप है कि दस्तावेज देखने के बाद भी उन्हें आगे बढ़ने के बजाय सड़क पर खड़े रहने को मजबूर किया जा रहा है।
खाने-पीने से लेकर सुरक्षा तक की समस्या
लंबे समय से सड़क पर खड़े ड्राइवरों के सामने भोजन और पीने के पानी की समस्या भी पैदा हो गई है। रात के समय ट्रकों में लदे सामान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ड्राइवरों ने डीजल चोरी होने का भी आरोप लगाया है। वहीं, आईओसीए से संबंधित सामान भी वाहनों में पड़ा होने की बात कही जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि यदि यह स्थिति और लंबी चली, तो संबंधित सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और लोगों को गैस सहित अन्य जरूरी सामग्री मिलने में परेशानी हो सकती है।
आरोप : यू-टर्न लेने को कह रहे स्थानीय अधिकारी
गाड़ी मालिकों और कारोबारियों का दावा है कि सभी वाहनों के पास वैध दस्तावेज, ई-वे बिल और टैक्स इनवॉइस मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्हें पश्चिम बंगाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे ट्रक मालिकों के सामने वाहन की किस्त चुकाने की समस्या भी खड़ी हो गई है। मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दस्तावेज सही हैं, तो वाहनों को किस आधार पर रोका जा रहा है। कारोबारियों का आरोप है कि स्थानीय अधिकारियों की ओर से कुछ वाहनों को वापस लौटने यानी यू-टर्न लेने के लिए कहा जा रहा है।
‘ऊपर के आदेश’ का हवाला
इस बारे में जब अलीपुरदुआर के GST अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गई, तो कथित तौर पर अधिकारियों ने इसे ‘ऊपर का आदेश’ बताते हुए आगे जानकारी देने से इनकार किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह निर्देश किस अधिकारी या किस स्तर से जारी हुआ है। कोलकाता स्थित संबंधित कार्यालय में भी GST के वरिष्ठ अधिकारी से मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। कार्यालय के कर्मचारियों की ओर से बताया गया कि अधिकारी व्यस्त हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि GST व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य, दोनों स्तर के विभाग हैं। कारोबारियों के अनुसार, मौजूदा मामला राज्य GST से संबंधित है। सामान्य तौर पर बंगाल से होकर गुजरने वाले ट्रांजिट वाहनों के ई-वे बिल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाती है तथा संदेह होने पर वाहन खोलकर सामान भी देखा जा सकता है। ऐसे में इन वाहनों को राज्य में प्रवेश से ही रोके जाने के आधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी या लिखित आदेश सामने नहीं आया है। यही वजह है कि वाहन मालिकों और ड्राइवरों में नाराजगी बढ़ रही है।
ड्राइवरों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ड्राइवरों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिनों में वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे ट्रक छोड़कर आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं। लंबे समय से सीमा पर फंसे रहने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं। मामला अब केवल सैकड़ों वाहनों के सीमा पर खड़े रहने तक सीमित नहीं है। कारोबारियों और वाहन मालिकों की मांग है कि प्रशासन स्पष्ट करे कि वाहनों को रोकने का आधार क्या है, ‘ऊपर के आदेश’ से किसका निर्देश समझा जा रहा है और वाहनों को पश्चिम बंगाल में प्रवेश की अनुमति कब दी जाएगी। इन सवालों के आधिकारिक जवाब का इंतजार ड्राइवरों, वाहन मालिकों और कार्बन कारोबार से जुड़े लोगों को है।