रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सुंदरवन डेल्टा के अंतिम छोर पर स्थित मुड़ीगंगा नदी से घिरा घोरमारा द्वीप वह जगह है जहाँ न बिजली है, न ही विश्वसनीय मोबाइल नेटवर्क। फिर भी SIR के तहत 3,575 मतदाताओं का ब्योरा तैयार कर 4 दिसंबर की समय-सीमा से पहले डेटा अपलोड करने के लिए चार बूथ लेवल अधिकारी (BLO) दिन-रात एक करके अद्भुत कार्य कर रहे हैं। यह तेजी से डूबता द्वीप पिछले 27 वर्षों में 120 वर्ग किमी से सिमटकर मात्र 4.2 वर्ग किमी रह गया है। चक्रवात बुलबुल (नवंबर 2019), अम्फान (मई 2020) और यास (मई 2021) ने इसे बुरी तरह तबाह किया है। इसके चलते सैकड़ों वैध मतदाता मुख्य भूमि या अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं। सागर ब्लॉक के रायपाड़ा जूनियर बेसिक स्कूल के शिक्षक और BLO दिलीप सामंत सोनारपुर में अपने परिवार के साथ रहते हैं, लेकिन 4 नवंबर से SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से वे केवल एक बार ही घर लौट पाए हैं। वे बताते हैं, “यहाँ दिन में नाव से घर-घर जाना पड़ता है। रात में लालटेन या मोमबत्ती की रोशनी में फॉर्म भरते हैं। कई घर तो अब हैं ही नहीं, सिर्फ़ खंभे बचे हैं जहाँ कभी मिट्टी के घर हुआ करते थे।”
डूबते द्वीप पर लोकतंत्र की आखिरी जंग
घोरमारा द्वीप में SIR कार्यों के सुपरवाइज़र देवाशीष ढाली ने बताया, “यहाँ बिजली नहीं है और इंटरनेट भी मुश्किल से मिलता है। डेटा अपलोड करने के लिए मुझे घोरामारा ग्राम पंचायत कार्यालय के सोलर-पावर्ड वाई-फाई पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार रात 2-3 बजे तक इंतजार करना पड़ता है जब सिग्नल थोड़ा मजबूत होता है।” द्वीप में चार मतदान केंद्र हैं। कुल 3,575 मतदाताओं का ब्योरा तैयार करना है। हाटखोला, चुनपुरी और रायपाड़ा जैसे अत्यधिक कटाव-ग्रस्त इलाकों में कई मतदाता लापता हैं या अन्यत्र चले गए हैं। BLO टीम अब भी उन परिवारों का इंतज़ार कर रही है जो शायद कभी लौटकर न आएं। घोरमारा की यह लड़ाई सिर्फ़ वोटर लिस्ट की नहीं है। यह उन लोगों की लड़ाई है जो जलवायु परिवर्तन की सबसे क्रूर मार झेल रहे हैं, फिर भी लोकतंत्र के आखिरी कतरे को बचाने की जिद नहीं छोड़ रहे। 4 दिसंबर तक ये चार BLO अपना काम पूरा कर लेंगे। लेकिन सवाल बना रहेगा, अगले चुनाव तक यह द्वीप रहेगा भी या नहीं?