सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आनंदपुर स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) में अब वरिष्ठ नागरिकों, शिशुओं के माता-पिता और DigiLocker के जरिये दस्तावेज साझा करने वाले आवेदकों को पहले की तुलना में काफी तेज सेवा मिलेगी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने हाल ही में कई सुधार लागू किए हैं, जिनका सीधा फायदा आवेदकों को मिल रहा है।
PSK ने संवेदनशील और समय-सीमित आवेदकों को प्राथमिकता देने के लिए S-token (स्पेशल टोकन) प्रणाली शुरू की है। इससे उनकी प्रतीक्षा अवधि काफी कम हो जाती है। एक अधिकारी के अनुसार, सामान्य N-token के तहत दस्तावेज जांच, फोटो कैप्चर और बायोमेट्रिक्स में करीब 45 से 55 मिनट लगते हैं। लेकिन वरिष्ठ नागरिकों और शिशुओं के माता-पिता को S-token जारी किए जाते हैं, जिनकी फाइलें पहले ली जाती हैं और लगभग तात्कालिक आधार पर प्रक्रिया पूरी होती है।
डीजीलॉकर के लिए अलग काउंटर
DigiLocker का इस्तेमाल करने वालों के लिए भी सुविधा बढ़ाई गई है। जो आवेदक अपने DigiLocker की एक्सेस सक्षम करते हैं, उन्हें एक अलग काउंटर पर भेजा जाता है जहां दस्तावेजों की जांच तुरंत हो जाती है। चूंकि DigiLocker में उपलब्ध दस्तावेज़ सीधे प्रमाणित डेटाबेस से आते हैं, इसलिए अधिकारियों को मैनुअल जांच में समय नहीं लगता। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आवेदक को DigiLocker ऐप डाउनलोड कर आधार, पैन, वोटर आईडी या शैक्षणिक प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज़ सीधे रिपॉजिटरी से मंगाने होंगे और फिर इसे पासपोर्ट सेवा पोर्टल से लिंक करना होगा। जिन लोगों को तुरंत यात्रा की आवश्यकता होती है, उनके लिए पासपोर्ट कार्यालय आपातकालीन वॉक-इन अपॉइंटमेंट की सुविधा भी देता है।
इसके लिए आवेदक को लिखित अनुरोध और आपातकालीन पासपोर्ट प्रोफॉर्मा जमा करना होगा। अधिकारी के अनुसार, आमतौर पर 2 से 3 दिनों में जवाब मिल जाता है, जिसके बाद वॉक-इन स्लॉट दिया जाता है। हालांकि इन सुधारों के बावजूद, पुलिस वेरिफिकेशन की कड़ी प्रक्रिया पासपोर्ट जारी होने की समयसीमा को प्रभावित कर रही है, जो कभी-कभी एक महीने तक खिंच सकती है। यह सख्ती उस बड़े घोटाले के बाद बढ़ाई गई है जिसमें 600 से ज्यादा पासपोर्ट फर्जी दस्तावेजों पर जारी कर दिए गए थे। लंबित फाइलों को निपटाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय विशेष जांच कैंप और पासपोर्ट अदालतें भी लगा रहा है।