कोलकाता : केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार और उसके बजट पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अकेले ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से बंगाल को 1.10 लाख करोड़ रुपये की सहायता दी, लेकिन इसके बावजूद राज्य की स्थिति बदहाल है, जो तृणमूल सरकार की विफलता को दर्शाती है। भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत भेजी गई राशि का जमीनी स्तर पर सही उपयोग नहीं हुआ। नियमों का उल्लंघन कर धन का दुरुपयोग किया गया और कार्य स्थल पर काम नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि आवास योजना के उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं किए गए, पीएम पोषण योजना में भ्रष्टाचार के आरोप हैं और आयुष्मान भारत योजना को बंगाल में लागू करने से राज्य सरकार ने इनकार कर दिया। पीएम किसान योजना भी दो वर्षों की देरी से लागू की गई। उन्होंने कहा कि यह बजट तृणमूल का अंतिम बजट नहीं, बल्कि उनका “विदाई पत्र” है। उन्होंने राज्य के बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस और आचार्य जगदीश चंद्र बोस की भूमि है, फिर भी विज्ञान शिक्षा की अनदेखी की गई और मदरसों को अधिक अनुदान दिया गया। मदरसों के लिए 5,713.61 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि उत्तर बंगाल के तीन करोड़ लोगों के लिए केवल 910 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मदरसों के नाम पर धन वितरित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार के बजट की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश की नाममात्र जीडीपी 4.18 से 4.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है और 2025-26 में 7.4 प्रतिशत विकास दर का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सूरत–डानकुनी फ्रेट कॉरिडोर, सिलीगुड़ी–वाराणसी कॉरिडोर और दुर्गापुर से लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी। एमएसएमई के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड घोषित किया गया है, जिससे पश्चिम बंगाल को बड़ा लाभ होगा। जूट उद्योग, टेक्सटाइल और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। महिला सशक्तीकरण के लिए बालिका छात्रावास और लखपति दीदी योजना जैसी पहलों को बजट की बड़ी उपलब्धि बताया गया।
SIR पर भूपेंद्र यादव का हमला
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं डाली जा सकती। इसके बावजूद बंगाल सरकार रुकावटें पैदा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां आग की घटना में 27 लोगों की मौत हुई, वहां मुख्यमंत्री अब तक नहीं पहुंचीं, जबकि शुभेंदु अधिकारी को कोर्ट के आदेश के साथ जाना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब मजदूरों को यूं छोड़ देना मानवता है। उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री कहेंगी कि वह क्याें नहीं गयीं। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दे दिया है कि एसआईआर में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, इसलिए एक लोकतांत्रिक मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें सभी बाधाओं को दूर करना चाहिए।