फाइल फोटो फाइल फोटो
कोलकाता सिटी

बंगाल बना आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण का मॉडल, काटने के मामलों में आयी भारी गिरावट

टीकाकरण, नसबंदी और गोद लेने की पहल ने दिखाया असर

कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश और इंसानों पर आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बीच पश्चिम बंगाल एक ऐसा उदाहरण पेश कर रहा है, जो अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है। राज्य में आवारा कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण और रेबीज के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गयी है।

काटने के मामलों में भारी कमी

बंगाल पशु संसाधन विकास (एआरडी) विभाग के अनुसार, 2025 में कुत्तों के काटने के मामलों में बीते तीन वर्षों की तुलना में भारी कमी आने की संभावना है। 2024 में जुलाई तक राज्य में केवल 10,264 मामले सामने आए, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 48,664 था। 2022 में 22,627 और 2021 में 76,486 मामले दर्ज किए गए थे।

देश भर की बात करें तो इस साल 1 जनवरी से अब तक चार लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले सामने आ चुके हैं। गुजरात (53,942) सबसे ऊपर है, इसके बाद कर्नाटक (39,437) और बिहार (34,442) का स्थान है।

रेबीज से सिर्फ एक मौत

राज्य में 2022 के बाद से रेबीज से केवल एक मौत हुई है, जो 2024 में दर्ज की गई। देशभर में इस साल रेबीज से कुल 54 लोगों की मौत हुई है। विशेषज्ञ इसे राज्य की प्रभावी टीकाकरण नीति और नसबंदी कार्यक्रम का परिणाम मानते हैं।

नसबंदी और गोद लेने की पहल बनी मुख्य वजह

एआरडी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नगर निकायों और निजी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे नसबंदी अभियानों और आवारा कुत्तों को गोद लेने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते यह सुधार संभव हो पाया है। बंगाल में हर साल औसतन 5,000 कुत्तों की नसबंदी की जाती है।

सरकारी और गैर-सरकारी प्रयासों की सराहना

एआरडी मंत्री स्वपन देबनाथ ने बताया कि 2023 में कुत्तों के काटने के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद सरकार ने पशु जन्म नियंत्रण अभियान को और तेज किया। उन्होंने कहा, "हमने नसबंदी अभियान को तेज किया है और गैर-सरकारी संगठनों को भी इसमें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया है।"

जनजागरूकता भी जरूरी

मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में स्थानीय निवासियों ने नसबंदी टीमों को आवारा कुत्तों को पकड़ने से रोका। इसके समाधान के लिए सरकार ने गैर-सरकारी संगठनों की मदद से लोगों को अभियान के महत्व के प्रति जागरूक करने की पहल की है।

SCROLL FOR NEXT