आतंकी फंडिंग से लेकर साइबर ट्रैकिंग तक होगी हाईटेक निगरानी
UAPA मामलों की सूचना 24 घंटे में NIA को देनी होगी
दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस ने व्यापक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की है। नई एसओपी के तहत राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को 'स्टेट टेरर मॉनिटरिंग ग्रिड' की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके माध्यम से राज्यभर में आतंकवादी गतिविधियों, कट्टरपंथ, आतंकी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर खुफिया एवं तकनीक आधारित निगरानी रखी जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, बंदरगाह, हवाई अड्डे, शहरी क्षेत्र और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नई एसओपी तैयार की गई है, ताकि आतंकवाद की रोकथाम, जांच और अभियोजन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
धारा 113 बीएनएस और यूएपीए के तहत होगी कार्रवाई
एसओपी के अनुसार आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 113 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के तहत की जाएगी। किसी भी मामले में इन धाराओं को लागू करने का निर्णय पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर का अधिकारी करेगा। यूएपीए के तहत दर्ज हर मामले की सूचना 24 घंटे के भीतर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अनिवार्य रूप से देनी होगी। वहीं, ऐसे मामलों की जांच उप पुलिस अधीक्षक (डिप्टी एसपी) से नीचे के अधिकारी नहीं करेंगे और पूरी जांच की निगरानी स्वयं एसपी करेंगे।
फॉरेंसिक और डिजिटल जांच पर रहेगा विशेष जोर
नई एसओपी में घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच को प्राथमिकता दी गई है। विस्फोट स्थल या संदिग्ध ठिकानों की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, ड्रोन मैपिंग, फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर), सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल फुटप्रिंट, मैसेजिंग ऐप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगी।
आतंकी फंडिंग पर सबसे बड़ा शिकंजा
एसओपी में आतंकवाद के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। हर आतंकी मामले में बैंक खाते, यूपीआई ट्रांजैक्शन, हवाला नेटवर्क, क्रिप्टोकरेंसी, संपत्तियां और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच अनिवार्य होगी। जरूरत पड़ने पर यूएपीए की धारा 51 के तहत आतंकवाद से जुड़ी संपत्तियों को जब्त या फ्रीज किया जाएगा। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), FIU-IND, आयकर विभाग, NIA और DRI के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
सीमावर्ती जिलों पर रहेगी विशेष निगरानी
नई एसओपी में उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, कूचबिहार और दक्षिण दिनाजपुर को प्राथमिक सीमा जिले घोषित करते हुए इन क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क, हथियारों की तस्करी, आतंकी लॉजिस्टिक्स और फंडिंग चैनलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एसटीएफ तैयार करेगी आतंकवाद से जुड़े चार विशेष डेटाबेस
बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) राज्य स्तर पर चार विशेष डेटाबेस तैयार करेगी। एसटीएफ द्वारा तैयार किए जाने वाले डेटाबेस में आतंकवादी संदिग्धों और कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़े व्यक्तियों का रिकॉर्ड, आतंकी फंडिंग, हवाला नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का विवरण, अवैध हथियारों के तस्करों, आपूर्तिकर्ताओं और बरामदगी से संबंधित जानकारी तथा विस्फोटक घटनाओं, बरामद विस्फोटकों और फॉरेंसिक जांच के निष्कर्षों का डाटा शामिल होगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन सभी सूचनाओं का नियमित रूप से विश्लेषण किया जाएगा और आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) सहित अन्य केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि आतंकवादी गतिविधियों की समय रहते पहचान कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
कट्टरपंथ रोकने पर भी रहेगा फोकस
एसओपी के तहत जिला पुलिस को कट्टरपंथ की ओर झुकाव रखने वाले व्यक्तियों की पहचान करने, उग्रवादी प्रचार पर नजर रखने, समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाने और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
हर तीन महीने में होगी समीक्षा बैठक
आतंकवाद निरोधी जांच को मजबूत बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों को साइबर इंटेलिजेंस, डिजिटल फॉरेंसिक, वित्तीय जांच, पूछताछ तकनीक और अदालत में प्रभावी पैरवी का नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो , एनआईए, बीएसएफ, एसएसबी, डीआरआई, एनसीबी और पड़ोसी राज्यों की एटीएस के साथ एसटीएफ मुख्यालय में प्रत्येक तिमाही मल्टी एजेंसी कोऑर्डिनेशन बैठक आयोजित की जाएगी। नई एसओपी के तहत एसटीएफ प्रमुख समय-समय पर आतंकी खतरे, सक्रिय जांच, कट्टरपंथ के संकेत, सीमा सुरक्षा, आतंकी फंडिंग, हथियारों की बरामदगी, अभियोजन की स्थिति और अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की समीक्षा करेंगे।