कोलकाता : दुनिया के सबसे बड़े पक्षी अवलोकन आयोजनों में शामिल यह अभ्यास 13 से 16 फरवरी के बीच हुआ। भारत में कुल 1,083 से अधिक प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें बंगाल शीर्ष पर रहा। यह जानकारी Birdwatchers’ Society के सदस्य और बंगाल समन्वयक शांतनु मन्ना ने दी। उन्होंने बताया कि यह प्रारंभिक सूची है और रिपोर्ट आने तक संकलन जारी था।बंगाल से इस बार कुल 2,012 चेकलिस्ट अपलोड की गईं, जबकि 2024 में यह संख्या 2,542 थी। चेकलिस्ट के मामले में केरल 12,702 से अधिक प्रविष्टियों के साथ देश में पहले स्थान पर रहा। इस साल भारत में कुल प्रजातियों की संख्या बढ़कर 1,083 हो गई, जो पिछले साल 1,068 थी।बंगाल में बीरभूम सबसे अधिक 219 प्रजातियों के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद दक्षिण 24 परगना (201) और मालदा (180) रहे। चेकलिस्ट की संख्या के लिहाज से दक्षिण 24 परगना 359 चेकलिस्ट के साथ पहले स्थान पर रहा, इसके बाद मालदा (311) और कोलकाता (218) रहे।
इस साल के प्रमुख अवलोकनों में मालदा में सायंता बसाक द्वारा देखी गई स्नोई-ब्राउड फ्लायकैचर (आमतौर पर पहाड़ी प्रजाति) और स्म्यू शामिल हैं। बारुईपुर में सुजीत कुमार मंडल द्वारा कॉमन स्टार्लिंग दर्ज की गई। Birdwatchers’ Society के कनाड बैद्य के अनुसार, बोलपुर में GBBC से पहले और दौरान दर्ज की गई हॉजसन बुशचैट बंगाल के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है।Cornell Lab of Ornithology और National Audubon Society द्वारा 1998 में शुरू किए गए इस चार दिवसीय आयोजन के तहत पक्षी प्रेमी बाहर जाकर पक्षियों की गिनती करते हैं और डेटा eBird पर अपलोड करते हैं। यह जानकारी बर्डवॉचर्स सोसाइटी के सुजन चटर्जी ने दी।पिछले कुछ वर्षों से प्रजातियों की संख्या 500 के आसपास बने रहने के सवाल पर चटर्जी ने कहा कि कोलकाता के आसपास अधिक लिस्टिंग होना और तारीखों का माध्यमिक या उच्च माध्यमिक परीक्षाओं से टकराना इसके कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नागरिकों, खासकर छात्रों में पक्षी अवलोकन के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए अधिक कैंप और कैंपस बर्ड वॉक आयोजित किए जा रहे हैं।प्रजातियों की सूची में शीर्ष प्रेक्षक सुभ्र पाखिरा (273), बहरुद्दीन शेख (245) और सायंता बसाक (169) रहे।
शांतनु मन्ना ने बताया कि हर जिले से कम से कम तीन चेकलिस्ट जमा की गईं। पिछले चार वर्षों में हर अभ्यास के दौरान दर्ज की गई कुल प्रजातियाँ 382 रहीं। इस साल केवल 6 नई प्रजातियाँ दर्ज हुईं, जबकि पिछले चार वर्षों में दर्ज 25 प्रजातियाँ इस साल नहीं दिखीं।इस अभ्यास के दौरान बंगाल के जिन शैक्षणिक परिसरों को कवर किया गया, उनमें IIM Joka, Presidency University, Durgapur College, Bijoygarh Jyotish Ray College और हावड़ा का Shyampur Siddheswari Mahavidyalaya शामिल हैं ।
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